Tuesday, August 19, 2014

भगवान कृष्ण को समझना जरूरी है।

भगवान  कृष्ण को समझना जरूरी है। हर लीला बालपन से लेकर भगवान के अवसान तक हमें एक रहस्य से पर्दा उठाती हुई नजर आती हैं। भगवान कृष्ण  की लीला  लिखना बहुत आसान है परन्तु समझ पाना लगभग
असम्भव अगर नहीं तो मुश्किल जरूर है क्योंकि लोग हर जगह की तरह यहां भी रस ढूंढ़ते हैं। और फिर रसपान करने में समझ का उपयोग करना कठिन लगता हैं।
भगवान कृष्ण कहते हैं (  गीता शलोक 10 वा अध्याय 6 ):
योगी को चाहिए कि वह एकान्त में अकेला बैठकर अपने -आपको वश में रखते हुए , सब इच्छाओं से मुक्त होकर और किसी भी परिग्रह (धन -सम्पत्ति या साज -सामान ) की कामना न करते हुए अपने मन को (परमात्मा में ) एकाग्र करे।
अब यहां पर रस ढूंढना  और वो भी समझ के साथ , तो जीवन सार्थक हैं। परन्तु धन -सम्पत्ति की लालसा या कामना और उसके व्यय करने की चिन्ता हमारी समझ को विचलित करती हैं और हमें आत्मिक जीवन से दूर ले जाती हैं।
ईसा  ने एक धनी आदमी से , जो कहता था कि  वह सब धार्मिक आदेशों का पालन करता है , कहा था : " फिर भी एक चीज़ तुममें नहीं है : जो कुछ तुम्हारे पास है , उस सबको बेच दो और गरीबों में बांट दो और इससे तुम्हे स्वर्ग में खज़ाना मिल जाएगा। " जब ईसा ने देखा कि यह सुनकर वह धनी आदमी बहुत उदास हो गया , तो उसने कहा :: " जिनके  पास धन है , उनके लिए परमात्मा के राज्य में  प्रवेश पाना बहुत कठिन होगा ;क्योंकि ऊंट के लिए सुई के छेद में से जाना आसान है , किन्तु धनी व्यक्त्ति के लिए परमात्मा के राज्य में प्रवेश कर पाना मुश्किल  हैं। "
गीता बताती है कि  सच्चा आनन्द आन्तरिक आनन्द है। शरीर मर सकता है और संसार नष्ट हो सकता है , परन्तु आत्मिक जीवन चिरस्थायी है। और हमारा खज़ाना संसार की नश्वर वस्तुएं नहीं हैं ,अपितु उस परमात्मा का ज्ञान और उसके प्रति प्रेम है जो अनश्वर हैं।
               मेरे भाग्य में नित्य आंसू और आहें लिख दो।
       और मुझे मेरे आत्म से दूर अपनी राह पर ले चलो ,
             जिससे अपने आत्म को गंवाकर मैं तुम तक पहुंच संकू।




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