Thursday, February 20, 2014

यहाँ सुख से सौ गुनी पीर देखी

हमने जग की अजब तस्वीर देखी                              रचित ----      कवि प्रदीप
एक हँसता हैं दस रोते हैं
 ये प्रभु की अजब जागीर देखी
हमे हँसते मुखड़े  चार मिले
 दुखिया चेहरे हजार मिले
 यहाँ सुख से सौ गुनी पीर देखी 
एक हँसता हैं दस रोते हैं
ये इसलिए सच हैं कयोंकि इस दुनिया में जानवर जायदा रहते हैं वो भी इंसानो का वेश बना कर। कुछ लोग हैं मेरे भाई दीपक जैसे इंसानियत को शर्मिन्दा करने पर तुले हुए हैं। मैं सोचता हूँ अगर वो मुझसे ऐसा सलूक कर सकते हैं तो फिर किसी और से ---
फिर मैं चारो तरफ नजर दौड़ाता हूँ तो देखता हूँ ये दुनिया रहने लायक भी बची हैं या नहीं।
झूठ , बेशर्मी  और न जाने कैसी सोच। जिस यमुना को लोग गन्दा करते हैं वही सीवर युक्त पानी का वो मथुरा
में  आचमन करते हैं।
                                                                                  -----शेष फिर !     

Saturday, February 15, 2014

एक श्रद्धांजलि अरविन्द केजरीवाल के इस्तीफ़े पर।

आज की ताजा खबर : देखिये दिल्ली विधानसभा में  बीजेपी MLA S  की अराजकता   और फिर कोसिए ,
कैसी व्वयस्था में - हमने किनको चुना था, जो लड़ते हैं  सच के खिलाफ। और जो झूठ हैं उसके साथ चुप-चाप बैठ  जाते हैं। और फिर बड़ी बेशर्मी से हँसते - हँसते टीवी के चैनल्स पर सच्चे बनने का ढोंग करते हैं। देशभक्ति के नारे लगाते हुए भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाते हैं। चाहे वो युददुरप्पा (बीजेपी) हो या राजा  हो या वीरप्पा मोइली हो
या कोई और।
आज अरविन्द केजरीवाल ने इस्तीफ़ा देकर सच की लड़ाई आगे बड़ाई हैं। बिना किसी डर के या बिना सत्ता के
लालच के  कुछ करना ये सब तो कुछ अजीब सा लगता हैं या स्वप्न लगता हैं। पर इस स्वप्न को सच कर दिखाया था अरविन्द ने।
हमे शायद आदत हो गयी हैं गन्दी व टूटी सड़को के बीच में  रहने की। रोज-रोज जाम सहने की। पुलिस की लाठी खाने की। गंदा पानी पीकर बीमार होने की। और तो और हम ये भी नहीं जानते कि जिस भ्रष्टाचार के फ्लाईओवर से रोज हम गुजरते हैं किसी दिन वो गिर जायेगा चाहे हम जितने मर्जी अमीर क्यों न हो।
जिस भ्रष्टाचार की A.C. रेल में  हम सफ़र करते हैं वो आये दिन आग में जल रही होती हैं।
इन हाई क्लास लोगो के ये नहीं मालूम कि यमुना को गन्दा रखकर वो कैंसर जैसी लाइलाज़ बिमारियों से आज घिरा हुआ हैं। और यमुना पर तो हजारों करोड़ रुपए खर्च करके भी  वो साफ़ न हो पायी। और बहुत कुछ हैं लिखने को
 पर आज इतना ही।
ये थी एक श्रद्धांजलि अरविन्द केजरीवाल के इस्तीफ़े पर।
 


Wednesday, February 12, 2014

' नायक ' अरविन्द केजरीवाल

' नायक ' अरविन्द केजरीवाल  ने आज   फ़िल्मी हीरो वाला काम किया हैं।  मुकेश अंबानी , मुरली देवड़ा और वीरपा मोइली
के खिलाफ FIR  करना एक बहुत ही साहस  वाला कार्य हैं जो एक साधारण मानव के वश का नहीं हैं।  मैं चकित हूँ कि इस इंसान को किसी का डर नहीं हैं। यहाँ भारत में ये नेता बिजनेसमैन गठजोड़ देश को बेच रहा हैं।
महंगाई बेलगाम हो कर नाक में दम कर चुकी हैं।
बात बहुत साधारण हैं जिस गैस के लिए रिलायंस ने 2 . 5 $ का एग्रीमेंट 2004 में 17 साल  के लिए किया था। वो पहले 4 . 5  $ हुई।  अब 8  $ होगी जिसका कोई सपष्टीकरण नहीं हैं। और तो और बांग्लादेश को वही गैस 2 $ पर एक्सपोर्ट होगी।  
  जाने कब अच्छे लोग हमारी राजनीति में चुने जायेंगे और मेरे भारत का भविष्य सुरक्षित होगा। मैंने पहले अपने ब्लॉग में  लिखा हैं
सच के ठेकेदार नाम से  में ---
- कि   "विचार शून्य लोग मिलकर इस धरती का भविष्य तय कर रहे हैं और यह लोग चीख रहे हैं कि यह धरती खतरे में हैं सच खतरे में हैं 'सच' खतरे में हैं ? तो पढे कुछ जीवन के कडवे सच जो हम सब की जिंदगी में रोज होते हैं पर हम उन्हे नजरअंदाज कर देते हैं यह वो सच हैं जो किसकी भी जिंदगी से जुड़े हो सकते हैं "

Sunday, February 9, 2014

माँ ओ माँ तू किथे गयी !

किसी   दी रबा माँ न मरे।
किसी  दी रबा माँ न मरे।
माँ मरे ते रिश्ते मुक जांदे ने।
माँ मरे ते सब पीछे छूट जाणदे  ने।
माँ  ओ माँ तू किथे गयी     
ओ माँ तू किथे गयी।
मैंने माँ के दिल को दुखाया
  राज ये जाना जब
अपनी माँ की अर्थी को कांधा  लगाया।
किसी दी रबा माँ न मरे।
ओ वी दिन मैं देख्या सी    जद
माँ खुद भूखी रहन्दी सी  ते
मैनु अपणे हथां नल खावन्दी सी।
बेशक मंदिर मस्जिद छोडो       ओ मैं वे  ऐ  केहना
कदी  माँ दा दिल न तोड़ो -कदी  माँ दा  दिल न तोड़ो।
इस माँ दिल विच रब रहन्दा।