Sunday, May 24, 2020

समय की सीमा?

ज्ञानगंज_का_रहस्य (भाग-1)शांग्री_ला_घाटी_का_रहस्य
हिमालय की गोद में बसी घाटी ज्ञान गंज से जुड़े ऐसे अनसुलझे रहस्य जिन्हें आज तक कोई वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाया...

क्या आपने कभी अमर दुनिया की कल्पनाओं के बारे में सुना है? क्या आपने कभी सोचा है कि इंसान के सदा अमर होने की कोई संभावना है?

खैर, आपको आश्चर्य होगा ये जानकर की हाँ ये संभव है|ऐसा सम्भव है हिमालय की गोद में बसी हुई एक जगह ज्ञान गंज में| ज्ञान गंज  को सिद्धश्रम, शांगरी ला या शम्बाला के नाम से भी जाना जाता है| इस जगह का उल्लेख रामायण, महाभारत आदि ग्रंथो में भी मिलता है|

ऐसा माना जाता है कि यह जगह किसी सिद्ध शक्ति के नियंत्रण में है और उनकी ईच्छा के बिना वहां से पत्ता भी नही हिलता है| कोई भी वहाँ न तो जा सकता है और ना ही वहाँ से वापस आ सकता है|वंहा वे ही लोग जाने में सफल हो पाते है जिनकी चेतना का स्तर उच्च हो|

इस जगह के बारे में ऐसा भी कहा जाता है कि यहाँ कोई मृत्यु नहीं होती। यहां रहने वाले संन्यासियों की उम्र रुक जाती है। इस मठ में समय को रोकने वाले महात्मा तपस्या लीन रहते हैं। आश्चर्य की बात है कि ये सैटेलाइट में भी नहीं दिखती। ये जगह किसी खास धर्म या कल्चर की नहीं है। न ही ईस्ट या वेस्ट से जुड़ी है।

लेखक जेम्स हिल्टन की किताब ‘Lost Horizon, about the lost kingdom of Shangri-La’ में भी इस जगह का जिक्र हुआ है।कहा जाता है कि जो भी इस जगह के लायक होता है, वह इसे ढूंढ सकता है। 1942 में एक अंग्रेज अफसर LP फरैल को इस जगह पर कुछ खास अनुभव हुए थे, जिसके बारे में उन्होंने 1959 में साप्ताहिक हिंदुस्तान में लेख प्रकाशित करवाए थे। तिब्बती बुद्धिस्ट्स का मानना है कि जब दुनिया में युद्ध होगा, शंभाला का 25वां शासक इस धरती को बचाने आएगा। योगी विशुद्धानंद ने भी इस आश्रम की शक्तियों को महसूस किया था।

इस घाटी के बारे में आप को अधिक जानकारी एक प्राचीन ग्रन्थ ‘काल विज्ञान’ जो की तिब्बत के तवांग मठ के एक पुस्तकालय में आज भी मौजूद है में मिल सकती है| इस किताब में वर्णन है की हम जिस संसार में रहते है वह तीन आयामी संसार है जहां हर वस्तू देश, समय, और नियती से बंधी हुई है| जब व्यक्ति ऐसे क्षेत्रो में प्रवेश कर जाता है जहां समय नगण्य है, तब वह समय के बन्धनों से परे चला जाता है. सरल शब्दों में हमारे यंहा के सेकड़ो वर्ष और वहां का एक पल बराबर होंगे| यानि कोई व्यक्ति ऐसे स्थानों पर यदि कुछ वर्ष बिता कर वापस आता है तो संभव है की उसके वापस आने तक हमारे संसार की सदियों गुजर चुकी हो. शंगरीला घाटी पर विचार, मन, और प्राण की शक्ति बहूत ही उच्च स्तर तक पहुँच जाती है|

जो लोग इस घाटी से परिचित है वो बताते है कि आज भी वहाँ ऐसे योगी और सिद्ध पुरुष मौजूद है जिनकी उम्र हजारो वर्ष है| एवं वे अपने दृश्य या अदृश्य रूप में यहां निवास करते है.

उनका दावा है कि प्रसिद्ध योगी श्यामाचरण लाहिड़ी के गुरु जिन्होंने शंकराचार्य को भी दीक्षा दी थी वे आज भी इन घाटियों (ज्ञानगंज, Gyanganj) के आश्रमों में निवास कर रहे है एवं समय समय पर आकाश मार्ग से आकर अपने शिष्यों को निर्देश भी देते है|

अनेको सैनिको, खोजकर्ताओ, पर्वतारोहियों, वैज्ञानिको आदि ने समय समय पर इस स्थान के बारे में अपने रोमांचकारी अनुभवों का विस्तार से वर्णन किया है| कई तरह के किस्से कहानियाँ भी इस जगह को लेकर प्रचलित है| लेकिन कभी भी यहाँ के रहस्यों को पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है।