Friday, January 24, 2020

सच में! शोर से!


समय के साथ ??
समय के साथ बदलती
धारणाएं
समय साक्षी है
स्वयं
  मौन सत्य के असत्य मे
परिवर्तन का
और
चिल्लाते शोर मे बोले गये
झूठ का सच मे बदल जाना
आँधियाँ चलने से
 आँखों में मिट्टी समा गयी
और
दृश्य अदृश्य हो गया।
खाली बैठने से कुछ न होगा
लड़ पड़ो झूझ जाना पड़ता है
ये सर्वविदित है।
परन्तु
आज समय बदल गया है
लड़कर मर कर  कभी कुछ
नहीं बदल सकता।
अभिमन्यु के मरने पर कुछ न बदला
हाँ , अर्जुन ने मारा निहथ्ये कर्ण को
तो सब कुछ बदल गया।
चिल्लाने से अगर झूठ मर जाये
 तो मारो।
 मारकर जीत सको तो
जीतो।
वरना चुपचाप बैठकर समय के निर्णय
से सहमति अनिवार्य है।