Sunday, September 28, 2014

मेरा भारत देश गन्दगी से भरपूर !

 मेरा भारत देश गन्दगी से भरपूर !
2 अक्टूबर को नरेंदर मोदी साहब स्वछ भारत प्रोग्राम का उदघाटन करेंगे। उस भारत का जिसके  बारे में अंतरराष्ट्रीय संगठन 'हाइजीन काउंसिल '  की रिपोर्ट कहती है :हमारे रसोईघरों में 92 %चाकू खतरनाक हद तक गंदे   होते हैं। 51 % सब्जियां बिना धोए पका दी जाती हैं और 45 % फल खाए जाने से पहले धोए नहीं जाते। 60 करोड़ से ज्यादा भारतीय खुले में शौच करते हैं वगरैह -वगरैह।
एक बार मैं  एक अच्छे खासे रईस आदमी के घर पार्टी में गया। खाना तो बहुत लजीज लग रहा था परन्तु उसके आस-पास मक्खियों का आना जाना भी लगा हुआ था मैंने जैसे ही इस बारे में कुछ कहा तो  उन्होंने खाने के आस -पास धूप जला दी। सब लोग मजे से खाने लगे। मुझे बहुत बुरा लगा। वो साहब आज तक नाराज हैं।
मथुरा में यमुना का पानी नहाने लायक भी नहीं पर लोग उसे पीते है नहाना तो आम बात है।
कहीं भी किसी भी शहर में किसी भी सरकारी अस्पताल के बाथरूम को देख लो शायद आप को बीमार होने  से कोई न रोक पायेगा। अब इससे से ज्यादा क्या लिखूं।
प्रधानमंत्रीजी , आप अपने बनारस की गलियों  देखिये तो नजर आएगा खुली हुई नालियों में बहती गंदगी खुले पड़े पुराने शौचलय जो मन को घिन से भर देंगे। बाते करने से काम नहीं होता।
अगर आप इस काम में कुछ कदम भी आगे बड़ा पाये तो शायद आप की गणना भारत के महान नेताओं में होगी। ये काम MOM  से भी बड़ा है।


Thursday, September 18, 2014

खून -खराबे से कैसे आदमी......

खून -खराबे से कैसे आदमी / समाज /देश पिछड़ जाते हैं इसकी मिसाल मैंने अखबार में  पढ़ी। सीरिया में तीन साल से जारी खूनी लड़ाई के कारण यह देश कम से कम तीस साल पीछे चला गया हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार सिरिया की करीब 45 %आबादी गरीबी की रेखा के नीचे   तुलना में   सिर्फ 12 % आबादी  मार्च 2011  गरीबी की रेखा के नीचे थी। गृहयुद्ध शुरू होने से पहले करीब 8 % आबादी बेरोजगार थी और अब है : लगभग  आधी आबादी। लड़ाई शुरू होने से पहले सीरिया उन गिने -चुने अरब देशों में एक था जो विकास के लक्ष्यों को पीछे छोड़ देते थे। मगर तीन साल बाद सिर्फ सोमालिया से बेहतर ?
यह तो एक बानगी है अभी तस्वीर बाकी है इराक , तुर्की आदि की।  

Thursday, September 4, 2014

हे भगवान, मैं कौन ?

मेरी अपनी आत्मा तू है ;
मेरी बुद्धि तू है ;
मेरे जीवन के कृत्य  (प्राण ) मेरे साथी है ;
शरीर मेरा घर है ;
इन्द्रियों के विषयों का विविध उपभोग मेरी   पूजा  है ;
निंद्रा  समाधि की दशा है ;
मेरे कदम मंदिर की प्रदक्षिणा है  
और
मेरे सब वचन प्रार्थनाए है।
हे  भगवान , मैं
जो कुछ भी कर्म करता हूं ,
उनमें से प्रत्येक तेरी ही पूजा है।