Thursday, September 4, 2014

हे भगवान, मैं कौन ?

मेरी अपनी आत्मा तू है ;
मेरी बुद्धि तू है ;
मेरे जीवन के कृत्य  (प्राण ) मेरे साथी है ;
शरीर मेरा घर है ;
इन्द्रियों के विषयों का विविध उपभोग मेरी   पूजा  है ;
निंद्रा  समाधि की दशा है ;
मेरे कदम मंदिर की प्रदक्षिणा है  
और
मेरे सब वचन प्रार्थनाए है।
हे  भगवान , मैं
जो कुछ भी कर्म करता हूं ,
उनमें से प्रत्येक तेरी ही पूजा है।

 

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