Friday, April 6, 2012

मंजिल

सोचा था मंजिल पास हैं
जल्दी ही पहुँच जायेंगे हम
पहुंचे तो सही मगर
किस कीमत पर पैरों के तले कांटे दबाकर
गले में फूलो के हार पहन कर
पैरों से कांटे दबाए दबतें नहीं
मगर
फूलों की खुशुबू से हँसी रुकती नहीं
(मगर यह क्या )
आपने पैर देख लिए
पैरों के नीचे के कांटे देख लिए
लोगो ने हमारा दर्द जाना तो सही
मगर देर से
तब तक फूल मुरझा चुके थे
इस बार उन्हें मुरझाए हुए फूल न नजर आये ।
आये तो बस अंगड़ाई लेते हुए
कांटे नजर आये
उन्होंने फूलो को रोंद दिया
पर
फूलो के साथ हम भी तो थे
हाय
इन फूलो की रुदन से अच्छी
तो कांटो की चुभन थी
सपनो की लहरों में डूबे थे
जितना हमने समझा
मंजिल पास हैं
मंजिल उतनी ही दूर होती चली गयी

UDDAAN

उड़ान

Monday, March 19, 2012

नयी बाते

सब कुछ नया ठीक लगता हैं
पुराना मकान , पुरानी कार ,
पुराने कपडे नहीं पसंद हैं मुझे ।
क्या आपको हैं पसंद ये बाते ?
पर मुझे पसंद हैं पुरानी बाते ,
पर मुझे पसंद हैं पुरानी यादें ।
क्या आपको नहीं हैं पसंद ये आदतें ?
कुछ नयी बातें करे क्योंकि मुझे पसंद नहीं हैं ये आदतें
इसलिए चलो करे कुछ नयी बातें

फिर शुरू किया जाये

फिर शुरू किया जाये ।
सिफर होती जाती जिंदगी को देखने का सफ़र ।
सफ़र मेरा नहीं सबका हैं सिफर मेरा नहीं सबका हैं ।
फिर शुरू किया जाये ।
सिफर होती जाती जिंदगी को देखने का सफ़र ।
रुकना ,चलना ,बैठना या
फिर भागना मेरे पास हैं सब लेखा जोखा देखेने का सब्र
क्योंकि अब सब्र करना ही हैं जिंदगी का सफर ।
फिर शुरू किया जाये ।
सिफर होती जाती जिंदगी को देखने का सफ़र ।
अक्सर सोचा करता था
जो अब मेरे पास नहीं हैं
वो सब पर
जो अब मेरे पास हैं
शायद वो कुछ उमीदो से
बेहतर
शायद येही हैं वो सफ़र
जिसको देखने का हैं सब्र
फिर शुरू किया जाये ।
सिफर होती जाती जिंदगी को देखने का सफ़र ।