सोचा था मंजिल पास हैं
जल्दी ही पहुँच जायेंगे हम
पहुंचे तो सही मगर
किस कीमत पर पैरों के तले कांटे दबाकर
गले में फूलो के हार पहन कर
पैरों से कांटे दबाए दबतें नहीं
मगर
फूलों की खुशुबू से हँसी रुकती नहीं
(मगर यह क्या )
आपने पैर देख लिए
पैरों के नीचे के कांटे देख लिए
लोगो ने हमारा दर्द जाना तो सही
मगर देर से
तब तक फूल मुरझा चुके थे
इस बार उन्हें मुरझाए हुए फूल न नजर आये ।
आये तो बस अंगड़ाई लेते हुए
कांटे नजर आये
उन्होंने फूलो को रोंद दिया
पर
फूलो के साथ हम भी तो थे
हाय
इन फूलो की रुदन से अच्छी
तो कांटो की चुभन थी
सपनो की लहरों में डूबे थे
जितना हमने समझा
मंजिल पास हैं
मंजिल उतनी ही दूर होती चली गयी
No comments:
Post a Comment