फेल करने बहुत सारे काम इस पुलिस के जिम्मे है । अब देखो उन पुलिस वालो को जिन्होंने पुणे में किसानो
पर गोली चलाई । उन्होंने तो अपना फ़र्ज़ निभाया ? गोली चलाना ही तो उनको (पुलिस) सिखाया जाता है। अब
गोली से अगर कोई मर जाता है तो ये उनका फ़र्ज़ और अगर आम आदमी गलती से चींटी भी मार दे
तो क़त्ल है श्रीमान वो भी धारा ३०२ के अंदर जेल में । और पुणे वाले पुलिस भाई को हम promotion देंगे पर
अभी नहीं । इसलिए की हमे अभी थोड़ी शर्म आती है । अभी हम suspension का नाटक करेंगे । श्रीमान अगर
शर्म बाकी है तो suspension और enqiry का नाटक बंद करो और जेल में डालो पुलिस वालो को । ये सरे आम
क़त्ल है। और साथ दो उनका जो इस सिस्टम को बदलना चाहते है। इस सिस्टम को जिम्मेदार बनाना चाहते है।
वरना बेकार है कहते रहना की हम सबसे बड़े लोकतान्त्रिक देश मे रहते है( ??) कभी रामलीला मैदान मे आधी
रात को और कभी पुणे में दिन में ,और आगे ......
आज न्यूज़ पर देखा की ५ किसान गिरफ्तार पुलिस पर हमला करने के आरोप में । अब सारी दुनिया टीवी पर देख रही है पर हमारी कोर्ट नहीं देखती और किसानो को छोड़ कर पुलिस को नहीं पकडती यह हमारी कोर्ट है।
शर्म करो ! शर्म से डूब मरो!