Thursday, June 25, 2015

भागते भागते ! जीने का अधिकार मुझे मिला !

मैं कौन ?
 भागते भागते मैंने
 खड़े वक़्त से  पूछा।
जीवन की आपा -धापी  में ?
खोने का डर हमेशा।
कुछ पा कर भी
बहुत खोया मैंने
ऐसा तो नहीं।
फिर क्यों मैं
डरा -डरा हूँ।
वक़्त के गुजरने का
अहसास मुझे
जीने के लिए  या
जीने का अधिकार मुझे
मिला
जैसे-जैसे वक़्त गुजरा।





Monday, June 22, 2015

सत्य की जीत


सत्य की जीत 

सत्य की जीत का हम कैसे वर्णन कर सकते हैं?

सच और केवल एकदम सच
सच और सुन्दरता
सच और निडरता

सच और प्यार
सच और अहिंसा
सच और सहनशीलता

सच और चरित्र
सच और किसी वस्तु की इच्छा न होना
और सच ही इश्वर है

सच के लिए मरना
सच और जीवन
सच और तपस्या

सच की कीमत
सच को महसूस करना

तो यह थे सच्चाई के इतने विभिन्न रूप
परन्तु
लोग कहते हैं की :-
"मृत्यु ही सच है,यह जीवन झूठ है "
परन्तु मेरे विचार से जीवन ही सत्य है और शुरू से अंत तक हम अपनी-अपनी सच्चाईयों की लड़ाई लड़ते रहते हैं और अंत मे सच ही रहता है ,सच ही जीता है और अंततः सच जीतता है
इसीलिए कहा गया है:-
"सत्यमेव जयते "।