खत्म या शुरू
मृत्यु या जीवन
झूठ या सच
कुछ पता नहीं
वक़्त पर मेरा
कुछ बस नहीं
हर मोड़ पर
कुछ अजीब सा पर
बहुत पुराना सा
नजारा मैंने देखा
पुरानी बातें कुछ अच्छी
या बहुत बुरी
मुझे समझ नहीं आता
कि
सोते हुए मैं क्यों जागता हूँ
जीवन मेरा
पर अधिकार किसी और का
ओ ! ईश्वर तू मुझे मत बता
मत समझा
क्यूोंकि जब मैं गिरूंगा
तो मुझे तू उठाएगा
और मुझे गले लगाएगा।
मृत्यु या जीवन
झूठ या सच
कुछ पता नहीं
वक़्त पर मेरा
कुछ बस नहीं
हर मोड़ पर
कुछ अजीब सा पर
बहुत पुराना सा
नजारा मैंने देखा
पुरानी बातें कुछ अच्छी
या बहुत बुरी
मुझे समझ नहीं आता
कि
सोते हुए मैं क्यों जागता हूँ
जीवन मेरा
पर अधिकार किसी और का
ओ ! ईश्वर तू मुझे मत बता
मत समझा
क्यूोंकि जब मैं गिरूंगा
तो मुझे तू उठाएगा
और मुझे गले लगाएगा।