ध्यान लगे, नहीं लगे, ध्यान की स्थिति अच्छी हो, बुरी हो,कोई ध्यान देने की कोशिश न करें। आप ध्यान रेग्युलर कर रहे हो, ध्यान में सम्मिलित हो रहे हो, मंदिर में जा रहे हो, बस्स! इसी में सब कुछ हैं।ध्यान से जीवन में कभी अधोगति नहीं होगी, कभी डाऊनफाल नहीं होगा । हॉ एक सीढ़ी से दूसरी सीढ़ी में जाने में टाईम लगेगा । हरेक का टाइम अलग - अलग है। किसी को कम टाईम लगेगा, किसी को ज्यादा टाईम लगेगा। लेकिन ज्यादा समय इसलिए लग रहा है कि ऊपर जाकर नीचे न गिरना पड़े। समय प्रत्येक का अलग - अलग है । एक दफ़े प्राण छोड़ दो, लेकिन ध्यान मत छोड़ो। क्योंकि ध्यान छूट गया तो वो फिर प्राण छूटने जैसा ही है। क्योंकि फिर उस रास्ते पर चल रहे हैं जिस रास्ते का कोई अंत नहीं है, कोई एंड नहीं है।