Saturday, November 28, 2015

दर्द के साथ जीना

दर्द के साथ जीना ,
मुझे बिलकुल भी
अच्छा नहीं लगता है
पर शायद अकेला देख कर मुझे
दर्द से रहा नहीं जाता
 या फिर
दर्द से अपना अकेलापन
सहा नहीं जाता
नफरत है मुझे दर्द से
प्यार है दर्द को मुझसे
पर फिर जब मैं अकेला होता हूँ
दर्द आकर मेरा साथ देता है
और फिर थक हार कर
 मैं अपना सिर
उसके कांधे पर रख देता हूँ।




आकार की अवज्ञा मत करो।

ओ निराकार और असीम की पूजा करने
 वाले ?
आकार की अवज्ञा मत करो।
आकार में जो बसता हैं,
वह ईश्वर हैं।
प्रत्येक ससीम के भीतर
गम्भीर असीम का वास हैं।
अपनी विशुद्ध आनन्दमय आत्मा को
आवरण में डाले हुए
ससीम के भीतर असीम छिपा हैं।
अपनी दुरूह अशब्दता के ह्रदय में
आकार परमेश्वर के रहस्य की
महिमा को छिपाय हुए हैं।
आकार  निस्सीमता का चमत्कार - कुटीर हैं।
आकार मृत्यंजय वैखानस की गुफा हैं।
भगवान की गहराइयों में  भी सौंदर्य हैं।
जो स्वयं महाशचर्य हैं ,
उसी का चमत्कार अपने वास के लिए
सृष्टि की  रचना करता हैं।
                                                             लिखित                    श्री अरविन्द