हे ! मेघ मल्हार
तूने यह कौन से गीत गाए?
माँगी थी पानी की चँद बूँदे ,
तन को शीतल करने के लिए,
सोचा था तू आएगा खुशियाँ लाएगा ,हरियाली छाएगी।
तन मन की ऊष्मता भगाएगा
पर हे !
मेघ मल्हार तूने यह कौन से गीत गाए ?
मेघ मल्हार तूने यह कौन से गीत गाए ?
सोचा था , पढ़ा था ,
शुक -शुकी के गीतों के बारे में ,
राधा -कृष्ण की लीला के बारे में ,
सुना भी था -कोयल की कूकू के बारे में ,
सुना भी था ,पढ़ा भी था ,और भी बहुत कुछ अच्छा-अच्छा
पर हे ! मेघ मल्हार तूने यह कैसे गीत सुनाये
मैं सह भी जाता , मैं रह भी जाता ,
अगर इसमें होती किसी राधा की व्याकुलता ,
अपनें कृष्ण से मिलने की ,
पर अब मैं अपने मन की वेदना को ,
कैसे छुपाऊँ , हे !मेघ मल्हार तेरे
गीतों की त्रासदी मैं किस निर्ममता
से किस -किस को बताऊँ ,
हे !मेघ मल्हार तू ही मेरा दर्द जान ले ,
मुझमें छिपे एक इंसान को तू पहचान ले ,
हे! मेघ मल्हार ,
हे!मेघ मल्हार ,
हे! मेघ मल्हार । ।