Monday, July 28, 2014

"दिव्य प्रेम"

एक बार राबिया से पूछा गया :"क्या तुम सर्वशक्तिमान परमात्मा से प्रेम करती हो ?"
"हां। "
"क्या तुम शैतान से घृणा करती हो ?"   उसने उत्तर दिया :"भगवान  के प्रेम के कारण मेरे पास इतनी फुरसत ही नहीं रहती कि  मैं शैतान से घृणा कर संकू।मैंने पैगम्बर को सपने में देखा था। उसने पूछा ," अरी राबिया ,
क्या तू मुझसे प्रेम करती है ?"
मैंने उत्तर दिया," ओ खुदा के पैगम्बर , तुझसे कौन प्रेम नहीं करता ? परन्तु खुदा के प्रेम ने मुझे इतना तल्लीन कर लिया हैं कि मेरे दिल में किसी अन्य वस्तु  के लिए न तो प्रेम और न ही घृणा ही बाकी रही है। "
दिव्य प्रेम का अनुभव करने के लिए अन्य सब प्रेमों को त्याग देना होगा।

Tuesday, July 22, 2014

जागो दुनिया वालो , जागो

1.यूक्रेन के विद्रोहियों ने मलयेशियाई एयरलाइन्स के विमान को मार गिराया।
2.इराक और सीरिया के कुछ हिस्सों पर आई एस आई एस ने कब्ज़ा कर एक नए इस्लामी राष्ट्र की घोषणा कर दी है।
3.अफ़्रीकी देश नाईजीरिया में  बोको हरम का मामला :बड़ी संख्या में स्कूली लड़कियों को अगवा कर के अपने मुजाहिदीनों से जबरन शादी कराई गई।
4.सोमालिया के समुद्री लुटेरे दुनिया भर के व्यापारी जहाजों को लूटते जा रहे है।
5.अफगानिस्तान में  नाम के लिए हामिद करजई की सरकार है कब्ज़ा तालिबान का है।
6.गाज़ा पट्टी के बारे में  सबको पता है कि वहाँ क्या हो रहा है।
और क्या लिखने की जररूत है????
जागो दुनिया वालो , जागो  वरना ये नेता लोग हमे कहीं का नहीं छोड़ेंगे।

Sunday, July 13, 2014

"हां पिता , हां ,और सर्वदा हां। "

परमात्मा हमारे सम्मुख शर्ते रख देता है और उन्हें स्वीकार करना हमारा काम है।
हमें बहाव के विरुद्ध संघर्ष करने में  अपनी शक्ति का अपव्यय नहीं करना चाहिए।
हममें से अधिकांश लोग स्वाभविक मुनष्य होते है ,जो अपनी छोटी -छोटी योजनाओं
 के विषय में बहुत उत्सुक ,आवेशपूर्ण और सुनिशिचत होते है। परन्तु हमे बदलना होगा।
जिस उपाय द्वारा हम अधिकतम उपयोगी सिद्ध हो सकते है वह परमात्मा की इच्छा के
सम्मुख सिर झुका देने का ही है। संत  फ्रांसिस डि सालेस की एक प्रिय प्रार्थना में
 इस पूर्ण अधीनता की इस भावना को संक्षेप में इस प्रकार प्रकट किया गया है :
                                                   "हां पिता , हां ,और सर्वदा हां। "

Saturday, July 12, 2014

मंजिल !


सोचा था मंजिल पास है
 जल्द ही पहुँच जायेंगे हम
पहुँचे तो सही
मगर
किस कीमत पर
पैरों के तले काँटे दबाकर
गले में फूलों के हार पहनकर
पैरों से काँटे  दबाए दबते नहीं
  मगर
फूलो की खुशबू से हँसी  रूकती नहीं
मगर
ये क्या उन्होंने पैर देख लिए
पैरों  के नीचे दबे काँटे देख लिए।
लोगो ने हमारा दर्द जाना तो सही
मगर
 देर से

तब तक फूल मुरझा चुके थे
इस बार उन्हें मुरझाये हुए
 फूल न नजर आए
आए तो बस अँगडाई 
लेते हुए काँटे
 नजर आए
उन्होंने फूलो को रौंद दिया
पर फूलो के साथ
हम भी तो थे
हाय
इन फूलो की रूदन से
अच्छी तो
 काँटो  की चुभन थी।
सपनो की लहरों में
 डूबे थे हम
 जितना हमने समझा
 मंजिल पास है
मंजिल उतनी ही हमसे दूर होती चली गई।






 





मेरा दिल भी ?

जले-जले हैं
यहाँ के लोग क्यों
जले-जले से हैं
इनके दिल क्यों
मुझे डर है
कि
मेरा दिल भी  इनकी तरह
जलजला न हो जाये।
आबादी की 'मनहूसीयत ' में
छविगृहो की 'खुबसूरती ' में
 डूबा है ये समाज
दिल पुकार-पुकार कर
 कह रहा है ले चल इन
ईंटो की चारदीवारी से ,
पंखो की किलकारियों से
ले चल -ले चल  कहीं दूर
 कहीं मेरा दिल भी जलजला न हो जाये।