Monday, July 28, 2014

"दिव्य प्रेम"

एक बार राबिया से पूछा गया :"क्या तुम सर्वशक्तिमान परमात्मा से प्रेम करती हो ?"
"हां। "
"क्या तुम शैतान से घृणा करती हो ?"   उसने उत्तर दिया :"भगवान  के प्रेम के कारण मेरे पास इतनी फुरसत ही नहीं रहती कि  मैं शैतान से घृणा कर संकू।मैंने पैगम्बर को सपने में देखा था। उसने पूछा ," अरी राबिया ,
क्या तू मुझसे प्रेम करती है ?"
मैंने उत्तर दिया," ओ खुदा के पैगम्बर , तुझसे कौन प्रेम नहीं करता ? परन्तु खुदा के प्रेम ने मुझे इतना तल्लीन कर लिया हैं कि मेरे दिल में किसी अन्य वस्तु  के लिए न तो प्रेम और न ही घृणा ही बाकी रही है। "
दिव्य प्रेम का अनुभव करने के लिए अन्य सब प्रेमों को त्याग देना होगा।

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