जले-जले हैं
यहाँ के लोग क्यों
जले-जले से हैं
इनके दिल क्यों
मुझे डर है
कि
मेरा दिल भी इनकी तरह
जलजला न हो जाये।
आबादी की 'मनहूसीयत ' में
छविगृहो की 'खुबसूरती ' में
डूबा है ये समाज
दिल पुकार-पुकार कर
कह रहा है ले चल इन
ईंटो की चारदीवारी से ,
पंखो की किलकारियों से
ले चल -ले चल कहीं दूर
कहीं मेरा दिल भी जलजला न हो जाये।
यहाँ के लोग क्यों
जले-जले से हैं
इनके दिल क्यों
मुझे डर है
कि
मेरा दिल भी इनकी तरह
जलजला न हो जाये।
आबादी की 'मनहूसीयत ' में
छविगृहो की 'खुबसूरती ' में
डूबा है ये समाज
दिल पुकार-पुकार कर
कह रहा है ले चल इन
ईंटो की चारदीवारी से ,
पंखो की किलकारियों से
ले चल -ले चल कहीं दूर
कहीं मेरा दिल भी जलजला न हो जाये।
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