फिर शुरू किया जाये ।
सिफर होती जाती जिंदगी को देखने का सफ़र ।
सफ़र मेरा नहीं सबका हैं सिफर मेरा नहीं सबका हैं ।
फिर शुरू किया जाये ।
सिफर होती जाती जिंदगी को देखने का सफ़र ।
रुकना ,चलना ,बैठना या
फिर भागना मेरे पास हैं सब लेखा जोखा देखेने का सब्र
क्योंकि अब सब्र करना ही हैं जिंदगी का सफर ।
फिर शुरू किया जाये ।
सिफर होती जाती जिंदगी को देखने का सफ़र ।
अक्सर सोचा करता था
जो अब मेरे पास नहीं हैं
वो सब पर
जो अब मेरे पास हैं
शायद वो कुछ उमीदो से
बेहतर
शायद येही हैं वो सफ़र
जिसको देखने का हैं सब्र
फिर शुरू किया जाये ।
सिफर होती जाती जिंदगी को देखने का सफ़र ।
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