Sunday, February 9, 2014

माँ ओ माँ तू किथे गयी !

किसी   दी रबा माँ न मरे।
किसी  दी रबा माँ न मरे।
माँ मरे ते रिश्ते मुक जांदे ने।
माँ मरे ते सब पीछे छूट जाणदे  ने।
माँ  ओ माँ तू किथे गयी     
ओ माँ तू किथे गयी।
मैंने माँ के दिल को दुखाया
  राज ये जाना जब
अपनी माँ की अर्थी को कांधा  लगाया।
किसी दी रबा माँ न मरे।
ओ वी दिन मैं देख्या सी    जद
माँ खुद भूखी रहन्दी सी  ते
मैनु अपणे हथां नल खावन्दी सी।
बेशक मंदिर मस्जिद छोडो       ओ मैं वे  ऐ  केहना
कदी  माँ दा दिल न तोड़ो -कदी  माँ दा  दिल न तोड़ो।
इस माँ दिल विच रब रहन्दा।

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