भगवान कहते हैं :
"तुम सब हुए हो और तुमने देखा है किया है और सोचा है ,
तुमने नहीं , लेकिन मैंने देखा है ,
और मैं हुआ हूं और मैंने किया है .......
तीर्थ -यात्री , तीर्थ-यात्रा और मार्ग ,
मैं स्वयं ही था ,जो अपनी ओर जा रहा था ;
और तुम्हारा
आगमन मेरे अपने द्वार पर मेरा ही आगमन था ……
आओ ,तुम भटके हुए कणों ,
अपने केन्द्र की ओर खिंच आओ .......
ओ किरणों ,जो सुदूर अन्धकार में भटकती रही हो ,
लौट आओ और वापस अपने सूर्य में विलीन हो जाओ। "
"तुम सब हुए हो और तुमने देखा है किया है और सोचा है ,
तुमने नहीं , लेकिन मैंने देखा है ,
और मैं हुआ हूं और मैंने किया है .......
तीर्थ -यात्री , तीर्थ-यात्रा और मार्ग ,
मैं स्वयं ही था ,जो अपनी ओर जा रहा था ;
और तुम्हारा
आगमन मेरे अपने द्वार पर मेरा ही आगमन था ……
आओ ,तुम भटके हुए कणों ,
अपने केन्द्र की ओर खिंच आओ .......
ओ किरणों ,जो सुदूर अन्धकार में भटकती रही हो ,
लौट आओ और वापस अपने सूर्य में विलीन हो जाओ। "
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