जगत भर की रोशनी के लिए
करोडो की जिन्दगी के लिए
सूरज रे जलते रहना
भले ही अंग तेरा भस्म हो जाये
तू जल जल के यहाँ किरणे लूटा रे
ये एक लीला हे भगवन की फ़िल्म राजा हरिशचन्द्र
उसने मुझे अधिक से अधिक अंधकारपूर्ण घड़ी में भी नहीं छोड़ा हैं। कई बार तो उसने मुझे खुद मेरे ही
खिलाफ बचाया हैं और मुझे जरा सी भी स्वाधीनता नहीं दी हैं।
बात १३ अगस्त २००८ रात के ३ बज़े की हैं। स्थान -एक्शन बालाजी हॉस्पिटल , पश्चिम विहार ,न्यू दिल्ली
जिस समय मैने इसे सुना, मैं कोई सपना नहीं देख रहा था। मैं बिलकुल जागृत था।
आवाज सुनने के पहले मेरे ह्रदय में भारी मंथन चल रहा था।
.....................शेष बाकी
दिसंबर 25 ,2013
MARRY CHRISTMAS
भगवान के बेटे के जन्मदिन पर ये लिखना कि मेरे अनुभव ने जो मुझे दिया हैं --सत्य की जो जुड़ती हुयी छोटी-२ झांकियां मुझे हो पायी हैं , उनसे सत्य के उस अवर्णीय तेज की कल्पना नहीं हो सकती , जो हमारी आँखों से रोज दिखायी देने वाले सूरज के तेज से करोड़ गुना अधिक हैं। सच तो यह हैं कि जो मैंने देखा हैं वह उस अतुलनयी महान प्रकाश की हल्की सी झलकमात्र हैं।
जो अभेद्य अंधकार मेरे चोरो और छाया हुआ था, वह शाप नहीं वरदान निकला और देवीय प्रकाश मुझे कुछ समझा पाया और दिखा पाया और फिर मैं उस प्रकाश की और बड़ चला।
उस प्रकाश की शक्ति ने मुझे शक्ति दी और
मैं 14 अगस्त 2008 को दोपहर बाद अपने घर में था। ये जानना नितांत आवशयक हैं कि 13 अगस्त रात्रि से पूर्व मैं बिस्तर से उठ पाने में असमर्थ था। हालाँकि
कुछ ऐसा जादू नहीं हुआ था कि मैं बिलकुल ठीक हो गया था। मेरा पुनर्जन्म हुआ था। मैने धीरे-२ परिस्थिति का मूल्यांकन करना शुरू किया।
इस भूमि पर मैंने ईश्वर जैसा कठोर मालिक नहीं देखा। वह आपकी परीक्षा बार -बार लेता ही रहता हैं। और
जब आपको ऐसा लगता हैं कि आपकी श्रद्धा या आपका शरीर आपका साथ नहीं दे रहा हैं और आपकी नॉव डूब रही हैं , तब वह आपकी मदद को किसी न किसी तरह पुहंच जाता हैं और आपको विश्वास करा देता और आपका संकेत पाते ही आने को तैयार हैं , परन्तु आपकी शर्त पर नहीं , अपनी शर्त पर। और
ये सब मुझे इतना आसान नहीं लगता। मुझे कई ऐसे उदहारण स्वयं से खोजने पड़े ऐसा कहना शायद अतिश्योक्ति होगा।
..............शेष बाकी
करोडो की जिन्दगी के लिए
सूरज रे जलते रहना
भले ही अंग तेरा भस्म हो जाये
तू जल जल के यहाँ किरणे लूटा रे
ये एक लीला हे भगवन की फ़िल्म राजा हरिशचन्द्र
उसने मुझे अधिक से अधिक अंधकारपूर्ण घड़ी में भी नहीं छोड़ा हैं। कई बार तो उसने मुझे खुद मेरे ही
खिलाफ बचाया हैं और मुझे जरा सी भी स्वाधीनता नहीं दी हैं।
बात १३ अगस्त २००८ रात के ३ बज़े की हैं। स्थान -एक्शन बालाजी हॉस्पिटल , पश्चिम विहार ,न्यू दिल्ली
जिस समय मैने इसे सुना, मैं कोई सपना नहीं देख रहा था। मैं बिलकुल जागृत था।
आवाज सुनने के पहले मेरे ह्रदय में भारी मंथन चल रहा था।
.....................शेष बाकी
दिसंबर 25 ,2013
MARRY CHRISTMAS
भगवान के बेटे के जन्मदिन पर ये लिखना कि मेरे अनुभव ने जो मुझे दिया हैं --सत्य की जो जुड़ती हुयी छोटी-२ झांकियां मुझे हो पायी हैं , उनसे सत्य के उस अवर्णीय तेज की कल्पना नहीं हो सकती , जो हमारी आँखों से रोज दिखायी देने वाले सूरज के तेज से करोड़ गुना अधिक हैं। सच तो यह हैं कि जो मैंने देखा हैं वह उस अतुलनयी महान प्रकाश की हल्की सी झलकमात्र हैं।
जो अभेद्य अंधकार मेरे चोरो और छाया हुआ था, वह शाप नहीं वरदान निकला और देवीय प्रकाश मुझे कुछ समझा पाया और दिखा पाया और फिर मैं उस प्रकाश की और बड़ चला।
उस प्रकाश की शक्ति ने मुझे शक्ति दी और
मैं 14 अगस्त 2008 को दोपहर बाद अपने घर में था। ये जानना नितांत आवशयक हैं कि 13 अगस्त रात्रि से पूर्व मैं बिस्तर से उठ पाने में असमर्थ था। हालाँकि
कुछ ऐसा जादू नहीं हुआ था कि मैं बिलकुल ठीक हो गया था। मेरा पुनर्जन्म हुआ था। मैने धीरे-२ परिस्थिति का मूल्यांकन करना शुरू किया।
इस भूमि पर मैंने ईश्वर जैसा कठोर मालिक नहीं देखा। वह आपकी परीक्षा बार -बार लेता ही रहता हैं। और
जब आपको ऐसा लगता हैं कि आपकी श्रद्धा या आपका शरीर आपका साथ नहीं दे रहा हैं और आपकी नॉव डूब रही हैं , तब वह आपकी मदद को किसी न किसी तरह पुहंच जाता हैं और आपको विश्वास करा देता और आपका संकेत पाते ही आने को तैयार हैं , परन्तु आपकी शर्त पर नहीं , अपनी शर्त पर। और
ये सब मुझे इतना आसान नहीं लगता। मुझे कई ऐसे उदहारण स्वयं से खोजने पड़े ऐसा कहना शायद अतिश्योक्ति होगा।
..............शेष बाकी
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