Saturday, December 7, 2013

तू क्या चाहता हैं !

मेरे परमेश्वर  तू क्या चाहता हैं ?
पहले  तू स्वयंवर रचाता हैं
मौत ,जो कि तेरी बेटी हैं
उससे मेरा  शादी करना चाहता हैं
हे मेरे परमेश्वर तू मेरा अन्त क्यूॊ
चाहता हैं। 
अपने नाटक में  हीरो के रोल का
वायदा करके
मुझे खलनायक बनाता हैं और फिर
मुझे अपना दामाद बनाता हैं
हे मेरे परमेश्वर तू क्या चाहता हैं।
अँधेरी गलियन में , मैं भटकता हूँ
सच-झूठ के नातॊ में  अटकता हूँ।
जाने -अन्जाने मैं क्या करता हूँ ,
मुझे है सब पता
कि
तुझे है सब पता



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