Wednesday, December 4, 2013

आग और बर्फ

आग और बर्फ  में  फर्क
कुछ भी नहीं हैं
जिंदगी  और मौत में  फर्क
 कुछ भी नहीं हैं
जीत और हार में  फर्क
कुछ भी नही  हैं
नज़रिया   बदले
यानि
 चश्मा पहने आँखों पर
फिर नजर आयेगा  सच
कि
जीत जाना यानि सब कुछ पा लेना
हार कर जीना यानि जीते जी मर जाना
तो मैं उठा हर बार जीतने को
इस जिंदगी को देखा कुछ ऐसे
नंगी आँखों पर चश्मा ? नहीं सब गलत है
फिर सोचा और पाया
कि हार और जीत से परे  है कुछ   आकार
जिसे मैं  समझ न पाया  बारम्बार
चश्मा जरूरी है
मगर नजर का नहीं।
मैंने पुछा किसी से न कुछ
मैंने कहा न किसी से कुछ। 
यानि
आग और बर्फ

आग और बर्फ  में  फर्क
कुछ भी नहीं हैं?

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