आग और बर्फ में फर्क
कुछ भी नहीं हैं
जिंदगी और मौत में फर्क
कुछ भी नहीं हैं
जीत और हार में फर्क
कुछ भी नही हैं
नज़रिया बदले
यानि
चश्मा पहने आँखों पर
फिर नजर आयेगा सच
कि
जीत जाना यानि सब कुछ पा लेना
हार कर जीना यानि जीते जी मर जाना
तो मैं उठा हर बार जीतने को
इस जिंदगी को देखा कुछ ऐसे
नंगी आँखों पर चश्मा ? नहीं सब गलत है
फिर सोचा और पाया
कि हार और जीत से परे है कुछ आकार
जिसे मैं समझ न पाया बारम्बार
चश्मा जरूरी है
मगर नजर का नहीं।
मैंने पुछा किसी से न कुछ
मैंने कहा न किसी से कुछ।
यानि
आग और बर्फ
आग और बर्फ में फर्क
कुछ भी नहीं हैं?
कुछ भी नहीं हैं
जिंदगी और मौत में फर्क
कुछ भी नहीं हैं
जीत और हार में फर्क
कुछ भी नही हैं
नज़रिया बदले
यानि
चश्मा पहने आँखों पर
फिर नजर आयेगा सच
कि
जीत जाना यानि सब कुछ पा लेना
हार कर जीना यानि जीते जी मर जाना
तो मैं उठा हर बार जीतने को
इस जिंदगी को देखा कुछ ऐसे
नंगी आँखों पर चश्मा ? नहीं सब गलत है
फिर सोचा और पाया
कि हार और जीत से परे है कुछ आकार
जिसे मैं समझ न पाया बारम्बार
चश्मा जरूरी है
मगर नजर का नहीं।
मैंने पुछा किसी से न कुछ
मैंने कहा न किसी से कुछ।
यानि
आग और बर्फ
आग और बर्फ में फर्क
कुछ भी नहीं हैं?
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