Sunday, January 18, 2015

MR.TERRORIST, I AM NOT TERRORIZED

I AM NOT TERRORIZED

 YESTERDAYDAY ,

YOU KILLED
       
  AT CHARLIE HABDO.

I  AM NOT TERRORIZED.

   THOUGH
    
  YOU KILLED
           
      INNOCENT CHILD / KIDS

I AM NOT TERRORIZED

YES,

I KNOW YOU ARE
             
 KILLING INNOCENT PUPIL LIKE ME

BUT I AM NOT  SCARED

  BECAUSE
         
YOUR EVERY STEP SHOWED

 THAT YOU ARE SCARED OF ME.

SO, MR.TERRORIST
               
I AM NOT TERRORIZED .

Monday, January 5, 2015

हमारे पास दिमाग है .....?

एक स्टेडियम में खेल चल रहे थे। भीड़ बहुत अधिक नहीं थी। आठ लड़कियां रेसिंग ट्रेक पर दौड़ने के लिए तैयार खड़ी थी।
रेड़ी .... स्टेडी ... बैंग
घंटी की आवाज़ के साथ ही लड़कियों ने दौड़ना शुरू किया। अभी उन्होंने 10 से 15 कदम ही तय किए थे कि एक लड़की का पैर फिसल गया और वह गिर गयी। वह दर्द में कराह रही थी। सातों लड़कियों ने उसके रोने की आवाज़ सुनी और दौड़ना बंद कर दिया। पीछे मुड़कर उसे देखने लगी और अंत में , दौड़ते हुए उस लड़की के पास चली गयी।
सातों ने उसे उठाया , उसे शांत करने लगी और फिर सबने एक दूसरे का हाथ पकड़ लिया। सब साथ चलती -दौड़ती रही।  वे सातों एक समय पर जीत के निशान तक पहुंची। अधिकारी देखकर हैरत में थे। वहां बैठे लोगो की आंखें भर आयी।
ऐसा वास्तव में हुआ है। यह दौड़ नेशनल इंस्टीटूयट ऑफ मेंटल हेल्थ की ओर से आयोजित की गयी थी। सभी
उम्मीदवार मंदबुद्धि थे।
और उन्होंने सिखाया क्या ?
समूह भावना , मानवीयता , खेल भावना , प्यार , देखभाल और समानता।
हम और आप यदि इस जगह होते तो क्या ऐसा करते ? शायद नहीं , कारण   …
हमारे पास दिमाग है .....
हममें अहंकार है.......
हममें एटीट्यूड है.......
हम व्यावहारिक है ......

Wednesday, November 26, 2014

मेरे भगवान , मेरे पिता

I . हे  भगवान , मैं कौन
मेरी अपनी आत्मा तू है ;
मेरी बुद्धि तू है ;
मेरे जीवन के कृत्य  (प्राण ) मेरे साथी है ;
शरीर मेरा घर है ;
इन्द्रियों के विषयों का विविध उपभोग मेरी   पूजा  है ;
निंद्रा  समाधि की दशा है ;
मेरे कदम मंदिर की प्रदक्षिणा है
और
मेरे सब वचन प्रार्थनाए है।
हे  भगवान , मैं
जो कुछ भी कर्म करता हूं ,
उनमें से प्रत्येक तेरी ही पूजा है।

  II   मुझे भी अपना स्वभाव सीखा दो 
 ओ  धैर्यशाली तारो ,
 मुझे भी अपना स्वभाव सीखा दो ,
तुम जो प्रत्येक  रात्रि  में
इस प्राचीन आकाश में चढ़ते हो।
और आकाश पर
 न कोई छाया छोड़ते हो ,
 न कोई निशान ,
न आयु   का कोई चिन्ह
और
 न मृत्यु का कोई भय।


       III 
 भगवान कहते हैं :
"तुम सब हुए हो और तुमने देखा है  किया है और सोचा है ,
तुमने नहीं , लेकिन मैंने देखा है ,
 और मैं  हुआ हूं और मैंने किया है .......
तीर्थ -यात्री , तीर्थ-यात्रा और मार्ग ,
मैं  स्वयं ही था ,जो अपनी ओर जा रहा था ;
 और तुम्हारा
आगमन मेरे अपने द्वार पर  मेरा ही आगमन था ……
आओ ,तुम भटके हुए कणों ,
अपने केन्द्र की ओर खिंच आओ .......
ओ किरणों ,जो सुदूर अन्धकार में भटकती रही हो ,
लौट आओ और वापस अपने सूर्य में विलीन हो जाओ।

IV .दिव्य प्रेम
 एक बार राबिया से पूछा गया :"क्या तुम सर्वशक्तिमान परमात्मा से प्रेम करती हो ?"
"हां। "
"क्या तुम शैतान से घृणा करती हो ?"   उसने उत्तर दिया :"भगवान  के प्रेम के कारण मेरे पास इतनी फुरसत ही नहीं रहती कि  मैं शैतान से घृणा कर संकू।मैंने पैगम्बर को सपने में देखा था। उसने पूछा ," अरी राबिया ,
क्या तू मुझसे प्रेम करती है ?"
मैंने उत्तर दिया," ओ खुदा के पैगम्बर , तुझसे कौन प्रेम नहीं करता ? परन्तु खुदा के प्रेम ने मुझे इतना तल्लीन कर लिया हैं कि मेरे दिल में किसी अन्य वस्तु  के लिए न तो प्रेम और न ही घृणा ही बाकी रही है। "
दिव्य प्रेम का अनुभव करने के लिए अन्य सब प्रेमों को त्याग देना होगा।

V.        "हां पिता , हां , और सर्वदा हां। "

 परमात्मा हमारे सम्मुख शर्ते रख देता है और उन्हें स्वीकार करना हमारा काम है।
हमें बहाव के विरुद्ध संघर्ष करने में  अपनी शक्ति का अपव्यय नहीं करना चाहिए।
हममें से अधिकांश लोग स्वाभविक मुनष्य होते है ,जो अपनी छोटी -छोटी योजनाओं
 के विषय में बहुत उत्सुक ,आवेशपूर्ण और सुनिशिचत होते है। परन्तु हमे बदलना होगा।
जिस उपाय द्वारा हम अधिकतम उपयोगी सिद्ध हो सकते है वह परमात्मा की इच्छा के
सम्मुख सिर झुका देने का ही है। संत  फ्रांसिस डि सालेस की एक प्रिय प्रार्थना में
 इस पूर्ण अधीनता की इस भावना को संक्षेप में इस प्रकार प्रकट किया गया है :
                                                   "हां पिता , हां ,और सर्वदा हां। "
 

Sunday, November 23, 2014

समय अभी है खून की पहचान बचाने का

नस -नस  में जहर है  भरा
कहीं गुस्सा है    तो
 कहीं नफरत की मिलावट खून में
कहीं कुंठाएं बन कर मिल गयी खून में तो
 कहीं  अंधविश्वासी धारणाए।
सब झूठ को बेचते हैं क्योंकि
 झूठ मिला है खून में।
सब बेचैन है
पर मैं चैन की नींद क्यों सो रहा हूँ ?
क्योंकि मेरी नस -नस  में भी जहर भरा है
 कुछ अजब सा !
सनक सी सवार है अजब सी ब्यार है
मन उतावला सा है  कुछ बेताब है
आओ जहर की जगह कुछ प्यार की बहार
कुछ कब्ज़ा जमीनों की बजाय दिलो पर करे
लड़े पर बचपन की मासूमीयत से लड़ कर
फिर दोस्त बन जाये
आओ एक नयी सनक से
धरती पर स्कूल या अस्पताल जैसे
नित नए रोज मंदिर  बनाए
आओ हम जहर निकाले  और
खंगाले अपने मन को
और पूछे क्यों तूफ़ान आया केदारनाथ में
क्यों गंगा -यमुना काली हो कर बेचैन है
समय अभी है मानव -सभ्यता को बचाने का
समय अभी है खून की पहचान बचाने का।

Sunday, November 2, 2014

झूठ की जमीन

हमारी जमीन , हमारे जमीर की पहचान है। अब हम सच की जमीन पर खड़े होकर कभी झूठ बोलते हैं तो कभी झूठ की जमीन पर खड़े होकर सच बोलते हैं। मुद्दा दरसल ये है कि सूर्य की रोशनी या हवा पर किसी का एकाधिकार नहीं है। उसी तरह भूमि पर भी अधिकार की बातें कुछ समझ पाना कठिन हैं। गांधीजी ने लिखा है कि  सम्पति के व्यकितगत स्वामित्व का कोई अधिकार स्वीकार नहीं जा सकता। और साफ -साफ लिखा था , देश में उपस्थित सट्टेबाज , भूस्वामी , कारखानेदार आदि हमारे देश की सफलता के सबसे बड़े बाधक हैं। वे सब शायद नहीं समझते है कि वे जनता के खून को चूसकर ही जी रहे हैं।इस तरह प्रकृति मानव की कृति नहीं हैं , उसकी सम्पदा भी मानव कृत नहीं है।
ईश्वर ही सबका मालिक है , संसार का सृजन किसी एक मानव के लिए नहीं किया है ,अपितु समस्त प्राणियों के लिए किया है। वक़्त ने इस समाज का मानवीकरण देखा है। और जैसे कि हवा,पानी और आकाश या सूर्य के प्रकाश का उपयोग सभी जीव रूप से करते हैं। इसी तरह पृथ्वी के उपभोग का भी सभी को समान अवसर मिलना चाहिए।
परन्तु  एक समाज के निर्माण बनिस्पत हम लोग छोटे -छोटे घरों के निर्माण में व्यस्त हैं। चीन कहता है तिब्बत उसका है ,सागर उसका है। पाकिस्तान के मुताबिक कश्मीर उसका है। और ISIS के अनुसार शायद भारत सहित कई  इस्लमिक मुल्क उसके नक़्शे में हैं। तो मानव समाज का क्या ??
क्या हम अभी भी सभ्यता की क , ख  सीख  रहे है? ये मंगलयान की बातें या अर्थवव्यस्था का भूमंडलीकरण सब कोरी बकवास है। क्योंकि एक बात तो स्पष्ट है कि समाज का एक हिस्सा आगे बड़ जाये और बहुत बड़ा भाग पीछे छूट जाए ऐसा सम्भव नहीं।

Sunday, October 19, 2014

और मैं हँस देता हूँ।

मेरी यादें ,
मेरे अकेलेपन को खाली कर देती हैं
 वक़्त ने एक दिन अहसास दिलाया
 और
 फिर मुझे बताया
और
भी कुछ है
जो मुझे रोकता है टोकता है
मसलन मेरा साया।
मेरी यादें ,
मेरे अकेलेपन को खाली कर देती हैं
जानें कितने बरस हुए मुझे के मैं न बरसा।
उस सावन भादों को तरसा।
वो अकेलापन बस अहसास उसका मुझे रुला जाता हैं
और मैं हँस  देता हूँ।

Wednesday, October 1, 2014

MY INDIA IS GREAT ! AFTER 67 YEARS NOTHING HAS CHANGED

. .GANDHI JI  IN 2-11-1919   COMPARE THIS WITH TODAY' POSITION
 . No one should spit or clean his nose on the streets. In some cases the sputum is so harmful that the germs are carried from it and they infect others with tuberculosis. In some places spitting on the road is a criminal offence. Those who spit after chewing betel leaves and tobacco have no consideration for the feelings of others. Spittle, mucus from the nose, etc, should also be covered with earth.
"Near the village or dwellings, there should be no ditches in which water can collect. Mosquitoes do not breed where water does not stagnate. Where there are no mosquitoes, the incidence of malaria is low. At one time, water used to collect around Delhi. After the hollows were filled, mosquitoes were greatly reduced and so also was malaria."

Gandhiji wrote on 17-12-1942, how simplicity helped healthy living:
". . . Many households are so packed with all sorts of unnecessary decorations and furniture which one can very well do without, that a simple living man will feel suffocated in those surroundings. They are nothing but means of harbouring dust, bacteria and insects. . . I meant to say is that my desire to be in tune with the infinite has saved me from many complications in life. It led not merely to simplicity of household and dress but all round simplicity in the mode of my life. In a nutshell, and in the language of the subject under discussion, I have gone on creating more and more contact with akash. With the increase in the contact went improvement in health. I had more contentment and piece of mind and the desire for belongings almost disappeared. He who will establish contact with the infinite possesses nothing and yet possesses everything. In the ultimate analysis, man owns that of which he can make legitimate use and which he can assimilate. If everybody followed this rule, there would be room enough for all and there would be neither want nor overcrowding."
 कल  NDTV की एक रिपोर्ट  के मुताबिक दिल्ली में 10000 सफाई कर्मचारी होने चाहिये और  हैं सिर्फ 2600 ??? मुझे आश्चर्य होता है और दुखी तो खैर सभी हैं !! कि  . पता सब को सब कुछ है पर कोई कुछ करता नहीं सिवाय बातें करने के। सबको पता है कि गंगा ही नहीं बाकि नदिया भी गन्दी हो चुकी है।  प्रकृति हमे चेतवानी पिछले कई  सालों से दे रही है पहले लद्दाख में , फिर उत्तराखंड में  और इस साल जम्मू और कश्मीर में।   सब जगह हम गन्दगी के ढेर फेकते जा रहे हैं। और बाते सफाई की करते हैं।

Sunday, September 28, 2014

मेरा भारत देश गन्दगी से भरपूर !

 मेरा भारत देश गन्दगी से भरपूर !
2 अक्टूबर को नरेंदर मोदी साहब स्वछ भारत प्रोग्राम का उदघाटन करेंगे। उस भारत का जिसके  बारे में अंतरराष्ट्रीय संगठन 'हाइजीन काउंसिल '  की रिपोर्ट कहती है :हमारे रसोईघरों में 92 %चाकू खतरनाक हद तक गंदे   होते हैं। 51 % सब्जियां बिना धोए पका दी जाती हैं और 45 % फल खाए जाने से पहले धोए नहीं जाते। 60 करोड़ से ज्यादा भारतीय खुले में शौच करते हैं वगरैह -वगरैह।
एक बार मैं  एक अच्छे खासे रईस आदमी के घर पार्टी में गया। खाना तो बहुत लजीज लग रहा था परन्तु उसके आस-पास मक्खियों का आना जाना भी लगा हुआ था मैंने जैसे ही इस बारे में कुछ कहा तो  उन्होंने खाने के आस -पास धूप जला दी। सब लोग मजे से खाने लगे। मुझे बहुत बुरा लगा। वो साहब आज तक नाराज हैं।
मथुरा में यमुना का पानी नहाने लायक भी नहीं पर लोग उसे पीते है नहाना तो आम बात है।
कहीं भी किसी भी शहर में किसी भी सरकारी अस्पताल के बाथरूम को देख लो शायद आप को बीमार होने  से कोई न रोक पायेगा। अब इससे से ज्यादा क्या लिखूं।
प्रधानमंत्रीजी , आप अपने बनारस की गलियों  देखिये तो नजर आएगा खुली हुई नालियों में बहती गंदगी खुले पड़े पुराने शौचलय जो मन को घिन से भर देंगे। बाते करने से काम नहीं होता।
अगर आप इस काम में कुछ कदम भी आगे बड़ा पाये तो शायद आप की गणना भारत के महान नेताओं में होगी। ये काम MOM  से भी बड़ा है।


Thursday, September 18, 2014

खून -खराबे से कैसे आदमी......

खून -खराबे से कैसे आदमी / समाज /देश पिछड़ जाते हैं इसकी मिसाल मैंने अखबार में  पढ़ी। सीरिया में तीन साल से जारी खूनी लड़ाई के कारण यह देश कम से कम तीस साल पीछे चला गया हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार सिरिया की करीब 45 %आबादी गरीबी की रेखा के नीचे   तुलना में   सिर्फ 12 % आबादी  मार्च 2011  गरीबी की रेखा के नीचे थी। गृहयुद्ध शुरू होने से पहले करीब 8 % आबादी बेरोजगार थी और अब है : लगभग  आधी आबादी। लड़ाई शुरू होने से पहले सीरिया उन गिने -चुने अरब देशों में एक था जो विकास के लक्ष्यों को पीछे छोड़ देते थे। मगर तीन साल बाद सिर्फ सोमालिया से बेहतर ?
यह तो एक बानगी है अभी तस्वीर बाकी है इराक , तुर्की आदि की।  

Thursday, September 4, 2014

हे भगवान, मैं कौन ?

मेरी अपनी आत्मा तू है ;
मेरी बुद्धि तू है ;
मेरे जीवन के कृत्य  (प्राण ) मेरे साथी है ;
शरीर मेरा घर है ;
इन्द्रियों के विषयों का विविध उपभोग मेरी   पूजा  है ;
निंद्रा  समाधि की दशा है ;
मेरे कदम मंदिर की प्रदक्षिणा है  
और
मेरे सब वचन प्रार्थनाए है।
हे  भगवान , मैं
जो कुछ भी कर्म करता हूं ,
उनमें से प्रत्येक तेरी ही पूजा है।