Thursday, August 15, 2013

आज १५ अगस्त हैं

प्रिय नरेश ,
आज १५ अगस्त हैं सुबह सात बजे टीवी पर लालकिले का  कार्यक्रम   चल रहा था।
पहले झंडा फहराने के वक़्त जनगण मन हुआ।   कुछ याद आया ,
फिर मन हुआ कि साथ-साथ गाऊँ। पर वक़्त गुजर गया और फिर एक बहुत ही कमजोर भाषण हुआ।
 पर अंत में फिर जनगण मन शुरू हुआ, इस बार मेरी  आँखों में आसूँ भर आये   और
मैं जनगण मन गाने लगा।
फिर मैंने 'शहीद' मूवी देखी। उसके बाद अन्नू कपूर का प्रोग्राम "भारत की बात सुनाता हूँ।" देखा( NDTV पर  )
जाने 'मैं ' कहाँ  खो गया।
 सिर्फ १५ अगस्त की ही बात नहीं हैं,
 वो आदर्शवाद की बाते।
वो सपने।
शायद मैं अब जहाँ हूँ   वहाँ से मुड़कर कुछ कर पाना  शायद बहुत कठिन हैं
समाज को बदलना , नयी सोच लाना शायद सड़े गले शब्द हैं
क्योंकि
हम इस समाज के हिस्से- कायर हैं , डरपोक हैं।
गाँधी का नाम लेकर  प्रसन्न होते हैं।
और
भगवान् से डरते हैं
 प्यार करना शायद हमें  आता नहीं।
बाकी फिर लिखूँगा ।

 वैसे सच बात ये हैं कि
अब मौत बेवफा लगती हैं            और
जिंदगी का मत पूछ मेरे यार क्योंकि
संगदिल बातों पे यकीं मुझे कम हो चला हैं

कुछ तुम कहो।  एक बात रह गयी शायद --ये  गाना सुनना --मुकेश का (फिर सुबह होगी )
"आसमान पे है खुदा और ज़मीन पे हम
आजकल वो इस तरफ देखता है कम
आजकल किसी को वो रोकता नहीं
चाहे कुछ भी कीजये टोकता नहीं     -----

Tuesday, August 6, 2013

ONLY ONE REVOLUTION ? YES

PAK HAS ATTACKED & KILLED 5 INDIAN SOLDIERS.CHINA IS THREATING ON LADAKH FRONT.
RUPEE 61.70 Vs.1 $ U.S.

HIGH INFLATION LOW GROWTH RATE THIS IS WHEN AN ECONOMIST IS OUR PRIMEMINISTER..

POLICE ATTACKED ON INNOCENT PEOPLE ( AGNST. PEACEFUL DEMONSTRATION OF DEC.16 INCIDENT)

OUR HOMEMINISTER ( OLD MAN ) IS IN HOSPITAL.
 IAS OFFICER LIKE DURGA SHAKTI IS SUSPENDED BECAUSE OF HER  HONESTY &
HAS  BECOME A PRESTIGE ISSUE FOR U.P. GOVT.

CUT OFF % FOR MOST COURSES IS AROUND 92-95% IN D.U. IT SIMPLY MEANS THOSE WHO HAVE SECURED BELOW THIS CUT OFF ARE NOT ELIGBLE (OR NOT GOOD IN STUDIES) EVEN FOR COURSES LIKE
HISTORY(HONS.)

WHAT IS GOING ON. NO POLITICIAN IS RESPOSIBLE FOR ALL THIS THEN WHO IS
RESPONSIBLE ?

ANSWER IS SIMPLE : COMMON MAN.WHY THIS COMMON MAN IS AFRAID?

WHY THIS COMMON MAN DON'T WANT TO LEARN FROM HISTORY OR
EVEN PRESENTLY FROM EGYPT, TUNASIA , YAMEN ETC.
COMMUNITIES WHO FIGHT FOR THEIR TOMORROW WILL SURVIVE .

THIS IS A FACT.

Saturday, August 3, 2013

मैं और सिर्फ मैं

मैं हूँ , या हम है
या मैं और तुम है
या सिर्फ फिर
मैं ही हूँ
बहुत कोशिश की है  तलाश करने की
पर मुझे कुछ समझ
 नहीं आ रहा है
और कुछ अर्थ निकलता भी दिखाई
नहीं दे रहा,
कि
'हम' है , तुम है या सिर्फ मैं हूँ
कारण -मैं और मैं  से लगता है कि
मैं व्यर्थ ही, अहं को बड़ा रहा हूँ
एक मैं को लाकर ,
 दूसरे  मैं को  भुला रहा हूँ
इसलिए बहुत कोशिश की है
लेकिन
कुछ समझ नहीं आ रहा है
कारण -'मैं' और 'तुम'    व्यर्थ  नहीं है
क्योंकि  इसमें  दूरी  शब्द का
बहुत व्यापक अर्थ है
और
इस शब्द से मुझे बहुत चिढ है
इसलिए तलाश कर रहा हूँ
मुझे मिला 'हम'
अब कारण -'हम ' बहुत सुंदर है
पर इसकी व्यापकता में
 मैं खो जाऊगा
तो सब व्यर्थ है
 और   दूरी फिर आएगी
और
नहीं ये सब गलत है
अब मैं तलाश नहीं करूँगा ,
'मैं'  को  पहचानने की कोशिश करूँगा
क्योंकि  मैं जब चाहूँ
इस 'मैं ' में  स्वाभिमान -अभिमान महूसस करूँगा
या फिर स्वाभिमान - अभिमान
  को मिटाकर
एक विरंचना करूँगा
इसलिए
मैं और तुम नहीं
'मैं' और हम नहीं
मैं और सिर्फ मैं

मैं कि खट्या

खट्या कि रब्बा
मैं कि खट्या
चैन मैनू मिलदा नहीं
बचैन हर वैले
 मेरा दिल रहंदा
वे रब्बा दस कि
मैं पुटया ओ पुटया
 खट्या कि रब्बा मैं
 कि खट्या
इको जींद मैनू मिली सी
ओ वी तडप दी रेह्न्दी है
किसी नु कुछ
 न कहन्दी है
ओ रब्बा दस मैनू
कि मैं पटया
ओ रब्बा दस मैनू की
 मैं खटया
बेचारी दे एस आलम  ने
मैनू
किते दा न छडया
ऐ मैनू किथे सटया

Thursday, August 1, 2013

विचारो की जमीन पर

विचारो की जमीन पर चलता हूँ
नंगे पैर
कभी-कभी काँटा चुभ जाता है
और
कभी -कभी पैर जल उठते है
झूठ के जूते पहन कर
निकलना पड़ता है कभी
तो कभी
बईमानी की चपल
जाने कब सीखूँगा मैं चलना
नंगे पाँव सच की जमीन  पर

Tuesday, July 30, 2013

मेरे विकास की यात्रा पूरी है

मोबाइल है , इन्टरनेट है .
टीवी के अन्ग्नीत चैनल है ,
मकान है कार है
बच्चे पब्लिक स्कूल में हैं
ब्रांडेड कपडे हैं
पूरी अलमारी भरी हैं एक घर में
एक घर में चार कमरे , चार टॉयलेट  है
ऐसा लगता है
सुविधाओं का बाज़ार बिछा है
एयर-कंडीशनर हर कमरे में लगा है ?
अगर नहीं
तो विकास अधूरा है
बच्चे TUTION क्लास में जाते है ?
अगर नहीं
तो विकास अधूरा है
हर आदमी का अलग बेडरूम है ?
अगर नहीं
तो प्राइवेसी अधूरी है
मन छटपटाता तो नहीं है ?
अगर है
तो कामनाऐ अधूरी है
मुझे कुछ  साफ़-साफ़
नहीं नज़र आता
इस विकास के जाल में खो
तो  नहीं गया ?
अगर खो गया
तो मेरे विकास की यात्रा पूरी है

Sunday, July 28, 2013

कतरा -कतरा दर्द का

कतरा -कतरा  दर्द का
लम्हा -लम्हा दर्द का
हर साँस में भर कर
जिया तो जाना
अहसास जुदा है
वक़्त ने मुझे दिया है
मेरे करम के मैंने उसे
बड़ी शिदत से जिया है
कोई ये न कहे ये कि   मैंने
हँसी से दर्द भरा निवाला
लिया है
आँसू है के
थमते नहीं
दर्द के सिलसिले  है  के
थमते नहीं
बस एक वक़्त है कि थम गया
कतरा -कतरा दर्द का , लम्हा -लम्हा दर्द का
जिया तो जाना
गुज़ारिश है कि उपरवाले           तेरी जमीन पर
सर रख के                                तू  क्यों न
मेरे दुश्मनों को                     ये दर्द के सिलसिले  दे
कतरा-कतरा दर्द का           लम्हा -लम्हा दर्द का 

Thursday, July 25, 2013

जीवन की किलकारिया या

जीवन की किलकारिया  या
मौत की घड़ी
सब कुछ मैं खड़ा -खड़ा देखता हूँ
घड़ी वो गुजर गयी कब मुझे याद नहीं
हर घड़ी पल - पल तडपता हुआ देखता हूँ
मेरे खुश हो जाने पे तू जलता हैं
तो मौत की घड़ी पर तू मुस्कराता है
ये सब मैं खड़ा - खड़ा देखता हूँ
अजब बेबसी हैं मेरी    कि
ये सब मैं खड़ा -खड़ा देखता हूँ
      जीवन की किलकारिया     या
मौत की

Saturday, July 6, 2013

यहाँ की ज़मीन !

जहाँ बैठौ वहाँ की जमीन चुभती हैं
कहीं गर्म हैं तो कहीं सर्द हैं
कहीं काँटे हैं तो कहीं पथरीली
नरम घास का अहसास शायद ग़ुम हैं
सर्द हैं या गर्म हैं हवाएँ
मौसम के खुशगवार होने का
मुझे हैं बेसब्री से इंतज़ार
इक पल को मैं क्या मानू
साल या महीना,
कुछ फर्क नहीं पड़ता
लगता हैं शायद अब बीता ये पल
देख कर कोहराम चारों तरफ का
मुझे लगता हैं इस पल को बीतने में
सदिया गुजर गई
मेरे सब्र की छोड़ो
अब   कुदरत  भी बेसब्र हो चली
जिस दुनिया को हमने संवारा सदियों में
उसे वो पल भर में तोड़ने चली
बेखबर सा फिर भी हूँ मैं
फिर भी ये सोचकर शर्मिंदा नहीं
खुश हूँ फिर भी कि
मेरे घर कभी ना आएगी ,मुझे तोडने .
सफ़ेद चादर सच की ओढ़ी हैं मैने
यकीन हैं मुझे कि
कफ़न में तब्दील न होगी ये
या
फिर इसके होते कफ़न की जरूरत नहीं मुझे