विचारो की जमीन पर चलता हूँ
नंगे पैर
कभी-कभी काँटा चुभ जाता है
और
कभी -कभी पैर जल उठते है
झूठ के जूते पहन कर
निकलना पड़ता है कभी
तो कभी
बईमानी की चपल
जाने कब सीखूँगा मैं चलना
नंगे पाँव सच की जमीन पर
नंगे पैर
कभी-कभी काँटा चुभ जाता है
और
कभी -कभी पैर जल उठते है
झूठ के जूते पहन कर
निकलना पड़ता है कभी
तो कभी
बईमानी की चपल
जाने कब सीखूँगा मैं चलना
नंगे पाँव सच की जमीन पर
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