Tuesday, July 30, 2013

मेरे विकास की यात्रा पूरी है

मोबाइल है , इन्टरनेट है .
टीवी के अन्ग्नीत चैनल है ,
मकान है कार है
बच्चे पब्लिक स्कूल में हैं
ब्रांडेड कपडे हैं
पूरी अलमारी भरी हैं एक घर में
एक घर में चार कमरे , चार टॉयलेट  है
ऐसा लगता है
सुविधाओं का बाज़ार बिछा है
एयर-कंडीशनर हर कमरे में लगा है ?
अगर नहीं
तो विकास अधूरा है
बच्चे TUTION क्लास में जाते है ?
अगर नहीं
तो विकास अधूरा है
हर आदमी का अलग बेडरूम है ?
अगर नहीं
तो प्राइवेसी अधूरी है
मन छटपटाता तो नहीं है ?
अगर है
तो कामनाऐ अधूरी है
मुझे कुछ  साफ़-साफ़
नहीं नज़र आता
इस विकास के जाल में खो
तो  नहीं गया ?
अगर खो गया
तो मेरे विकास की यात्रा पूरी है

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