उदास दर्पण में थी कुछ जिंदगी ठहरी हुई
झांककर देखा तो कुछ उम्मीद
और
नाउम्मीदगी के पलों की छाया
डर गया था में हैरान सा होकर
दबे पाँव पीछे हटा
मेरा साया भी मेरे साथ खड़ा था कुछ परेशान
जो अब तक
नहीं नजर आ रहा था वो अब
झांककर देखा तो कुछ उम्मीद
और
नाउम्मीदगी के पलों की छाया
डर गया था में हैरान सा होकर
दबे पाँव पीछे हटा
मेरा साया भी मेरे साथ खड़ा था कुछ परेशान
जो अब तक
नहीं नजर आ रहा था वो अब
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