Tuesday, April 21, 2020

मौन!

मौन ख़ुद में एक कष्टसाध्य साधना है, जो अंतर्मुखता पैदा करती और भीतर की ओर झाँक देखने की सहूलियतें हमें देती है. कई मर्तबा तो वाचालता की अपेक्षा मौन का प्रभाव कहीं गहरे से पड़ते देखा गया है. मौन से दुरूह कार्य भी सहज बन जाते हैं जब कि वाचालता से बिगाड़ की संभावना अधिक रहती है. मौन से हमारी क्रियात्मकशक्ति भी बढ़ती है और अबाध रूप से हम इसके बल पर अनथक देर तक कार्यों में जुटे रह सकते हैं. गहन मौन से छनकर जो सृजन निकलता है, वह अपनेआपमें न सिर्फ़ नायाब बल्क़ि कालातीत भी होता है. अनूठा और बेजोड़. मानसिक स्वास्थ्य के लिये प्रतिदिन हमें मौन की साधना करनी ही चाहिए. रोज़ कुछ घंटे बिना बोले बितायें और तब मानसिक स्मरण करें.। 

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