Thursday, July 25, 2019

आदमी!


आदमी हँसता है, दुःख-दर्द सभी में आदमी हँसता है; जैसे हँसते-हँसते आदमी की  प्रसन्नता थक जाती है वैसे ही कभी-कभी रोते-रोते आदमी की उदासी थक जाती है, और आदमी करवट बदलता है; ताकि हँसी की छाह में कुछ विश्राम कर फिर वह आँसुओ की कड़ी धूप मे चल सके।

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