MERRY CHRISTMAS
भगवान के बेटे के जन्मदिन पर ये लिखना कि मेरे अनुभव ने जो मुझे दिया हैं --सत्य की जो जुड़ती हुयी छोटी-२ झांकियां मुझे हो पायी हैं , उनसे सत्य के उस अवर्णीय तेज की कल्पना नहीं हो सकती , जो हमारी आँखों से रोज दिखायी देने वाले सूरज के तेज से करोड़ गुना अधिक हैं। सच तो यह हैं कि जो मैंने देखा हैं वह उस अतुलनयी महान प्रकाश की हल्की सी झलकमात्र हैं।
जो अभेद्य अंधकार मेरे चोरो और छाया हुआ था, वह शाप नहीं वरदान निकला और देवीय प्रकाश मुझे कुछ समझा पाया और दिखा पाया और फिर मैं उस प्रकाश की और बड़ चला।
उस प्रकाश की शक्ति ने मुझे शक्ति दी हालाँकि
कुछ ऐसा जादू नहीं हुआ था, मेरा पुनर्जन्म हुआ था। मैने धीरे-२ परिस्थिति का मूल्यांकन करना शुरू किया।
इस भूमि पर मैंने ईश्वर जैसा कठोर मालिक नहीं देखा। वह आपकी परीक्षा बार -बार लेता ही रहता हैं। और
जब आपको ऐसा लगता हैं कि आपकी श्रद्धा या आपका शरीर आपका साथ नहीं दे रहा हैं और आपकी नॉव डूब रही हैं , तब वह आपकी मदद को किसी न किसी तरह पुहंच जाता हैं और आपको विश्वास करा देता और आपका संकेत पाते ही आने को तैयार हैं , परन्तु आपकी शर्त पर नहीं , अपनी शर्त पर। और
ये सब मुझे इतना आसान नहीं लगता। मुझे कई ऐसे उदहारण स्वयं से खोजने पड़े ऐसा कहना शायद अतिश्योक्ति होगा।
भगवान के बेटे के जन्मदिन पर ये लिखना कि मेरे अनुभव ने जो मुझे दिया हैं --सत्य की जो जुड़ती हुयी छोटी-२ झांकियां मुझे हो पायी हैं , उनसे सत्य के उस अवर्णीय तेज की कल्पना नहीं हो सकती , जो हमारी आँखों से रोज दिखायी देने वाले सूरज के तेज से करोड़ गुना अधिक हैं। सच तो यह हैं कि जो मैंने देखा हैं वह उस अतुलनयी महान प्रकाश की हल्की सी झलकमात्र हैं।
जो अभेद्य अंधकार मेरे चोरो और छाया हुआ था, वह शाप नहीं वरदान निकला और देवीय प्रकाश मुझे कुछ समझा पाया और दिखा पाया और फिर मैं उस प्रकाश की और बड़ चला।
उस प्रकाश की शक्ति ने मुझे शक्ति दी हालाँकि
कुछ ऐसा जादू नहीं हुआ था, मेरा पुनर्जन्म हुआ था। मैने धीरे-२ परिस्थिति का मूल्यांकन करना शुरू किया।
इस भूमि पर मैंने ईश्वर जैसा कठोर मालिक नहीं देखा। वह आपकी परीक्षा बार -बार लेता ही रहता हैं। और
जब आपको ऐसा लगता हैं कि आपकी श्रद्धा या आपका शरीर आपका साथ नहीं दे रहा हैं और आपकी नॉव डूब रही हैं , तब वह आपकी मदद को किसी न किसी तरह पुहंच जाता हैं और आपको विश्वास करा देता और आपका संकेत पाते ही आने को तैयार हैं , परन्तु आपकी शर्त पर नहीं , अपनी शर्त पर। और
ये सब मुझे इतना आसान नहीं लगता। मुझे कई ऐसे उदहारण स्वयं से खोजने पड़े ऐसा कहना शायद अतिश्योक्ति होगा।
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