माँ सी प्यारी,
सबसे न्यारी
गर्व दिलाती, ईठलाती सी,
कोमल सी,
मेरी हिंदी मेरे भारत के माथे की बिंदी
बोलूँ तो तू मुझे मेरी बहना सी लगे,
लिखूं तो बीवी का गहना
हिंदी तेरे रूप अनेक,
तू अरबों के प्राण स्वरूप
मैं क्या तेरा बखान करूँ
तेरे में समाए प्रेमचंद और
मैेथिलीशरण जैसे महापुरुष अनेक
नमन हो सुमित्रा नंदन पंत को या
राष्ट्र कवि दिनकर को
जिन्होंने
तेरा शृंगार किया वीर रस में या
गौरव दिलाया कवि प्रदीप ने भक्ति रस में और
ह गौरव दिलाया मेरे भारत को अपने गीतों में
हे हिंदी तू मेरे हृदय में रहना,
मेरी माँ बन कर।
मेरी माँ बन कर।।
सबसे न्यारी
गर्व दिलाती, ईठलाती सी,
कोमल सी,
मेरी हिंदी मेरे भारत के माथे की बिंदी
बोलूँ तो तू मुझे मेरी बहना सी लगे,
लिखूं तो बीवी का गहना
हिंदी तेरे रूप अनेक,
तू अरबों के प्राण स्वरूप
मैं क्या तेरा बखान करूँ
तेरे में समाए प्रेमचंद और
मैेथिलीशरण जैसे महापुरुष अनेक
नमन हो सुमित्रा नंदन पंत को या
राष्ट्र कवि दिनकर को
जिन्होंने
तेरा शृंगार किया वीर रस में या
गौरव दिलाया कवि प्रदीप ने भक्ति रस में और
ह गौरव दिलाया मेरे भारत को अपने गीतों में
हे हिंदी तू मेरे हृदय में रहना,
मेरी माँ बन कर।
मेरी माँ बन कर।।
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