Wednesday, February 22, 2017

आदमखोर हो चुका आदमी

आदमखोर हो चुका आदमी
खाने का बहुत शौकीन है?
पर अपनी आदत से मजबूर है
ये गुलिस्तां मेरा हिंदुस्तान था?
पर यहाँ जब से शौक आया
थोक के भाव आया
कभी लूटा करते थे महजब के नाम पर
अब लूट गए ऐ वतन तेरे नाम पर?
ये आदमी
कभी लूट करते थे जात के नाम पर
अब लूट गए विकास के नाम पर?
ये आदमी
आदमी की इस कौम में बड़ा दम है?
जीता आया ?
हर तूफ़ान से लड़ता आया
कभी 1857 लड़ा तो कभी
1947 जीता ?
कभी लड़कर 62 में हारा तो
कभी 71 में जीता ?
हारा या जीता ? पर लड़ते -लड़ते बन  गया आदमखोर
कभी जमीर बेच कर जमीन निगल गया
तो कभी दिमाग बेच कर अपने रिश्तो को पी गया
खाने का ये शौकीन आदमी ,नहीं मालूम इसे
हदों की लकीर पर खड़ा ये आदमी





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