Thursday, May 29, 2014

जाने भी दो यारो !

जाने भी दो यारो यहाँ सब चलता हैं
कोई फर्क नहीं पड़ता हैं।
यहाँ सब चलता हैं।

वक़्त ने हमे सिखाया हैं कि भारत की जनता न केवल अनपढ़ हैं अपने अधिकारो को लेकर बल्कि आलस की मारी भी हैं ऐसा कहे तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

सचाई का ये रोना रोते हैं
झूठ के दर्शन पल -पल होते हैं।
बेचारा शब्द यहाँ बेमानी हैं
बईमानी में छुपी सारी कहानी हैं।
अरे नई खोजे अमेरीका ,जापान खोजे
हम करेंगे नक़ल करके मौजे।
जीवन -मरण ,सुख -दुःख
सब ऊपर वाले के हाथ हैं
अपने हाथ में बस आये माया
या
सुकोमल काया
मैं उसी में भरपाया।


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