Sunday, June 27, 2010
MY BUSINESS
THIS GOVERMENT IS TAKING DARING STEPS & HAVE NO FEAR AT ALL.THIS IS VERY DANGEROUS FOR ANY DEMOCRACY. OUR PRIMEMINISTER IS A WELL KNOWN ECONOMIST & I DON'T BELIEVE HE CAN TAKE SUCH A HARD STEP OF INCREASING PETROL,DIESEL & KEROSIENE PRICES IN ONE GO. INDIA IS NOT A RICH COUNTRY.I THINK HE HAS FORGOTTEN THAT INDIA IS A POOR COUNTRY & MAJORITY OF INDIANS STRUGGLE FOR THEIR DAY TO DAY SURVIVAL.DIRECT IMPLICATION OF INCREASING PRICES IS INCREASE IN ALL FOOD ITEMS BESIDES ALL COMMODITIES . THIS IS AN ALARMING POSITION WHERE AN ELECTED GOVERMENT DON'T CARE AT ALL OF PUBLIC AT LARGE.WHAT TO SAY MORE THAN THIS THAT THIS GOVERMENT IS NOT A FRIENDLY GOVT. AT ALL.
Sunday, June 20, 2010
पिताजी ने कहलवाया है
मैंने, माँ से कहा- पूछो , पिताजी से ,
कैसे हो ?
मैंने, माँ से कहा -कहो पिताजी से ,
मैं हरपल उन्हें याद करता हूँ ।
मैंने, माँ से कहा- बताओं पिताजी को
कि मैं अभी भी उनका इंतज़ार करता हूँ ।
मैंने, माँ से कहा- बोलो पिताजी को
जैसे- जैसे मैं बड़ा हुआ,
अपने पैरों पर खडा हुआ,
तो बिन उनके जमीन वो नहीं थी समझदारी की ।
मैंने, माँ से बहुत कुछ कहा
कि ये बोलो ,वो बोलो,
ढेर सारी थी मेरी फरमाईशेँ ।
बहुत सारी थी मेरी बातें और मेरी ख्वाहिशैँ ।
मैंने ,माँ से कहा- बताना पिताजी को
कि मैं भी बन चुका हूँ पिता ,
समझ पाता हूँ दर्द उनका,
ना पूरी कर पाना उम्मीदों का मेरी।
तो ,माँ ने कहा- पिताजी ने कहलवाया हैं-
मेरा बेटा पिता बन कर समझदार होने को आया है ।
कैसे हो ?
मैंने, माँ से कहा -कहो पिताजी से ,
मैं हरपल उन्हें याद करता हूँ ।
मैंने, माँ से कहा- बताओं पिताजी को
कि मैं अभी भी उनका इंतज़ार करता हूँ ।
मैंने, माँ से कहा- बोलो पिताजी को
जैसे- जैसे मैं बड़ा हुआ,
अपने पैरों पर खडा हुआ,
तो बिन उनके जमीन वो नहीं थी समझदारी की ।
मैंने, माँ से बहुत कुछ कहा
कि ये बोलो ,वो बोलो,
ढेर सारी थी मेरी फरमाईशेँ ।
बहुत सारी थी मेरी बातें और मेरी ख्वाहिशैँ ।
मैंने ,माँ से कहा- बताना पिताजी को
कि मैं भी बन चुका हूँ पिता ,
समझ पाता हूँ दर्द उनका,
ना पूरी कर पाना उम्मीदों का मेरी।
तो ,माँ ने कहा- पिताजी ने कहलवाया हैं-
मेरा बेटा पिता बन कर समझदार होने को आया है ।
मेरा देश -प्रेम
क्या देशप्रेम केवल सीमाओ पर लड़ना है ?
क्या देशप्रेम देश की बड़ी समस्याओं से लड़ना है ?
नहीं, मेरा देशप्रेम इन सबसे जुदा है।
जीवन जीना परिवार के लिए,
क्या देशप्रेम नहीं है ?
जीवन जीना- एक स्वस्थ विचारधारा लेकर ,
क्या देशप्रेम नहीं है ?
मुधर हो वाणी मेरी ,
मुधर हो व्यक्तित्व मेरा ,
मुधर हो मेरे रिशते सबसे ,
यही मेरा देशप्रेम है ।
क्या देशप्रेम देश की बड़ी समस्याओं से लड़ना है ?
नहीं, मेरा देशप्रेम इन सबसे जुदा है।
जीवन जीना परिवार के लिए,
क्या देशप्रेम नहीं है ?
जीवन जीना- एक स्वस्थ विचारधारा लेकर ,
क्या देशप्रेम नहीं है ?
मुधर हो वाणी मेरी ,
मुधर हो व्यक्तित्व मेरा ,
मुधर हो मेरे रिशते सबसे ,
यही मेरा देशप्रेम है ।
Thursday, June 17, 2010
MY BUSINESS
IT IS VERY NECESSARY TO UNDERSTAND WHAT IS HAPPENNING.LAST 3-4 DAYS ADAG STOCKS HAS SHOWN SOME STRENGTH WHICH PAVES THE WAY FOR NIFTY TO GO ON HIGHER SIDE.NOW,IT IS THE TURN OF RIL TO SOME STRENGTH.OUR MARKET HAS OUTPERFORMED IN THE WORLD MKT.& LIKELY TO DO SO IN FUTURE.
Thursday, June 10, 2010
MY BUSINESS
AT the end of day please remember my writting of last Sunday,metals have pickedup with buying in lower levels in banks.this will continue till tomorrow.Market is waiting for good news to overcome of Europe crises.There is so much cashflow in the market ,it is unbelievable.So,in the long run indian mkts will outperform.
Sunday, June 6, 2010
MY BUSINESS - NOW-A-DAYS
NOW-A-DAYS ON EVERY LOW LEVEL PICK UP ANY PSU BANK LIKE VIJAYA BANK,ANDHRA BANK,UCO BANK.ONE CAN BUY METALS ALSO FOR VERY SHORT TERM GAIN.THESE TRADING TIPS ARE FOR TOMORROW OR DAY AFTER TOMORROW(WEEK STARTING FROM 7 TH JUNE 2010)
Sunday, May 30, 2010
MY BUSINESS
MY BUSINESS CAN BE OF ANYONE'S BUSINESS.TODAY'S HOT PICK IS SHARE
MARKET.NO FUNDAMENTAL,NO INVESTOR FRIENDLY AS IT USED TO BE IN EARLIER
DAYS. IT IS TOTALLY INTRA DAY TRADER-FRIENDLY MARKET.KEEP ON GUESSING
HOW AFTER DOW HAS LOST 1% OR 2% NEXT MORNING SUDDENLY YOU'LL FIND
SELLERS ONLY IN OUR MARKET OR VICE-VERSA. ANOTHER INERSTING THING IS
THAT ONE DAY IF ONE SECTOR IS GOOD.IN FEW DAYS FUNDAMENTALS GOES WRONG & ANOTHER NEW SECTOR WILL BE MORE ATTRACTIVE.THIS IS A CHAIN & ONE CAN
EASILY TRAPPED IN THIS.So,YOU ARE MOST WELCOMED FOR HANDSOME RETURN
BUT AS A SHORT TERM INVESTOR.IF YOU HAVE EARNED PROFIT IN ONE DAY OR IN
FEW HOURS OR IN FEW MINUTES DON'T WAIT SELL IT & KEEP MONEY FOR NEXT
DAY. TO BE CONTD.
MARKET.NO FUNDAMENTAL,NO INVESTOR FRIENDLY AS IT USED TO BE IN EARLIER
DAYS. IT IS TOTALLY INTRA DAY TRADER-FRIENDLY MARKET.KEEP ON GUESSING
HOW AFTER DOW HAS LOST 1% OR 2% NEXT MORNING SUDDENLY YOU'LL FIND
SELLERS ONLY IN OUR MARKET OR VICE-VERSA. ANOTHER INERSTING THING IS
THAT ONE DAY IF ONE SECTOR IS GOOD.IN FEW DAYS FUNDAMENTALS GOES WRONG & ANOTHER NEW SECTOR WILL BE MORE ATTRACTIVE.THIS IS A CHAIN & ONE CAN
EASILY TRAPPED IN THIS.So,YOU ARE MOST WELCOMED FOR HANDSOME RETURN
BUT AS A SHORT TERM INVESTOR.IF YOU HAVE EARNED PROFIT IN ONE DAY OR IN
FEW HOURS OR IN FEW MINUTES DON'T WAIT SELL IT & KEEP MONEY FOR NEXT
DAY. TO BE CONTD.
Saturday, May 1, 2010
मैं और माँ!
माँ! कुछ दिन तू और ना जाती ,
मैं ही नहीं बहु भी कहती ,
कहते सारे पोते नाती ,
माँ! कुछ दिन तू और ना जाती ।
रोज सवेरे मुझे जागना ,
बैठे पलंग पर भजन सुनाना ,
प्यारे कृष्ण के अनुपम किस्से,
तेरी दिनचर्या के हिस्से ,
पूजा के तू कमल बनाती ,
माँ ! तू कुछ दिन तू और ना जाती।
वृदावन तुझको ले जाता ,
यमुनाजी में स्नान कराता ,
धीरे-धीरे पाँव दबाता ,
तू जब भी थक कर सो जाती ।
माँ! कुछ दिन तू और ना जाती ।
कमरे का वो सूना कोना ,
चलना फिरना खाना सोना ,
रोज सुबह ठाकुरजी को नहलाना ,
बच्चो को तुझको टहलाना,
जिसको तू देती थी रोटी ,
गैया आकर रोज रंभाती ।
माँ! कुछ दिन तू और ना जाती।
सुबह देर तक सोता रहता ,
घुटता मन में रोता रहता ,
बच्चे तेरी बाते करते ,
तब आँखों से आंसू झरते ,
माँ अब तू क्यों न सहलाती ।
माँ! कुछ दिन तू और ना जाती ।
अब जब से तू चली गयी हैं ,
मुरझा मन की कली गयी हैं ,
थी ममत्व की सुन्दर मूरत,
तेरी वो भोली सी सूरत ,
दृढ़ निश्चय और वज्र इरादे ,
मन गुलाब की कोमल पाती।
माँ!कुछ दिन तू और ना जाती।
मैं ही नहीं बहु भी कहती ,
कहते सारे पोते नाती ,
माँ! कुछ दिन तू और ना जाती ।
रोज सवेरे मुझे जागना ,
बैठे पलंग पर भजन सुनाना ,
प्यारे कृष्ण के अनुपम किस्से,
तेरी दिनचर्या के हिस्से ,
पूजा के तू कमल बनाती ,
माँ ! तू कुछ दिन तू और ना जाती।
वृदावन तुझको ले जाता ,
यमुनाजी में स्नान कराता ,
धीरे-धीरे पाँव दबाता ,
तू जब भी थक कर सो जाती ।
माँ! कुछ दिन तू और ना जाती ।
कमरे का वो सूना कोना ,
चलना फिरना खाना सोना ,
रोज सुबह ठाकुरजी को नहलाना ,
बच्चो को तुझको टहलाना,
जिसको तू देती थी रोटी ,
गैया आकर रोज रंभाती ।
माँ! कुछ दिन तू और ना जाती।
सुबह देर तक सोता रहता ,
घुटता मन में रोता रहता ,
बच्चे तेरी बाते करते ,
तब आँखों से आंसू झरते ,
माँ अब तू क्यों न सहलाती ।
माँ! कुछ दिन तू और ना जाती ।
अब जब से तू चली गयी हैं ,
मुरझा मन की कली गयी हैं ,
थी ममत्व की सुन्दर मूरत,
तेरी वो भोली सी सूरत ,
दृढ़ निश्चय और वज्र इरादे ,
मन गुलाब की कोमल पाती।
माँ!कुछ दिन तू और ना जाती।
Wednesday, March 17, 2010
सुनो, सोचो और समझो
मैंने सुना,मैंने सोचा
और
फिर मुझे याद आया
कि जहाँ कही भी
मैं गलत होता हूँ
तुम और सिर्फ तुम
मुझे सही कर देती हो
और
मुझे अहसास भी नहीं होता
मैंने सुना, मैंने सोचा
और फिर मुझे याद आया
कि
मुझे सही होने की उतनी ख़ुशी या गम नहीं
जितना रश्क मुझे इस बात का हैं कि
मेरे स्वाभिमान और तुमारे अभिमान में
सिर्फ 'स्व' जैसे उपसर्ग का फर्क हैं
फिर भी मैने सोचा
और फिर मुझे याद आया
शायद 'स्व' को मुझे मिटाना होगा
और फिर अहसास दिलाना होगा
कि स्वाभिमान -अभिमान बहुत वजनदार हैं
वैसे
बहुत मजेदार हैं
फिर भी इन्हे मिटाना होगा। फिर भी इन्हे मिटाना होगा ।
और
फिर मुझे याद आया
कि जहाँ कही भी
मैं गलत होता हूँ
तुम और सिर्फ तुम
मुझे सही कर देती हो
और
मुझे अहसास भी नहीं होता
मैंने सुना, मैंने सोचा
और फिर मुझे याद आया
कि
मुझे सही होने की उतनी ख़ुशी या गम नहीं
जितना रश्क मुझे इस बात का हैं कि
मेरे स्वाभिमान और तुमारे अभिमान में
सिर्फ 'स्व' जैसे उपसर्ग का फर्क हैं
फिर भी मैने सोचा
और फिर मुझे याद आया
शायद 'स्व' को मुझे मिटाना होगा
और फिर अहसास दिलाना होगा
कि स्वाभिमान -अभिमान बहुत वजनदार हैं
वैसे
बहुत मजेदार हैं
फिर भी इन्हे मिटाना होगा। फिर भी इन्हे मिटाना होगा ।
Subscribe to:
Posts (Atom)