सदियों पहले
नदी ने कहा
जा रही हूँ...
पर्वत ने कहा – जाओ
नदी तबसे
जा ही रही है
उसका जाना
कभी ख़त्म नहीं हुआ
तुम जाना
तो ऐसे ही जाना
जितना जाना
उतना ही
बाकी रह जाना।
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