बहुत दर्द लिया बहुत दर्द में जिया
तो जाना वक्त तो रुक कर देख रहा था
और मैं भाग रहा था
बहुत दर्द लिया बहुत दर्द में जिया
तो जाना वक्त तो रुक कर देख रहा था
और मैं भाग रहा था
अहसास जिन्दिगी का रूह में और
मौत का पिंजर में
फर्क सिर्फ कहने भर से मिट जाता हैं
दर्द अगर हैं
जिस्म में और रूह में जनम भर का
मुझे प्यास लगी थी पानी की
भटकता रहा मैं जुनून
में
अमृत की तलाश में
तो जाना वक्त तो रुक कर देख रहा था
और मैं भाग रहा था
बहुत दर्द लिया बहुत दर्द में जिया
तो जाना वक्त तो रुक कर देख रहा था
और मैं भाग रहा था
अहसास जिन्दिगी का रूह में और
मौत का पिंजर में
फर्क सिर्फ कहने भर से मिट जाता हैं
दर्द अगर हैं
जिस्म में और रूह में जनम भर का
मुझे प्यास लगी थी पानी की
भटकता रहा मैं जुनून
में
अमृत की तलाश में
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